
लोकपथ लाइव, हरदौई। बीएसए कार्यालय में सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विज्ञान और गणित विषय के लिए नवनियुक्त हुए 61 शिक्षकों की महत्वपूर्ण और मूल पत्रावलियां (फाइलें) कार्यालय से रहस्यमय ढंग से गायब हो गई हैं। इस घोर लापरवाही और सरकारी फाइलों को कथित रूप से गायब करने या अपने पास दबाकर रखने के आरोप में वरिष्ठ सहायक अनुपम मिश्र के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। प्रधान सहायक शिवनिवास मिश्र की तहरीर पर कोतवाली शहर पुलिस ने गुरुवार की रात यह कार्रवाई की है। इस घटना के बाद से ही शिक्षा विभाग से लेकर प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।
न्यायालय से जिले के लिए 64 अभ्यर्थियों की एक अनंतिम चयन सूची जारी की गई थी। इनमें से 61 चयनित अभ्यर्थियों ने विभाग के सामने अपने मूल दस्तावेजों का मिलान (वेरिफिकेशन) कराया था। इसके बाद बीते 30 मार्च 2026 को डायट (DIET) हरदोई में इन शिक्षकों की स्कूल आवंटन व पदस्थापन काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी की गई थी। इस पूरी चयन प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण मूल पत्रावली पटल सहायक शिवनिवास मिश्र के पास सुरक्षित रखी गई थी। लेकिन बाद में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के मौखिक निर्देश पर शिवनिवास मिश्र ने ये सभी फाइलें वरिष्ठ सहायक अनुपम मिश्र को सौंप दी थीं।
तबादले के बाद फाइलें न लौटाने का आरोप
मामले में असली पेंच तब फंसा जब मई 2026 में जिलाधिकारी (DM) के आदेश पर वरिष्ठ सहायक अनुपम मिश्र का ट्रांसफर जनगणना कार्यालय में कर दिया गया और उन्हें वहां अटैच (संबद्ध) कर दिया गया। अनुपम मिश्र ने नई जगह जाकर अपना कार्यभार भी संभाल लिया। विभागीय नियमों के मुताबिक, नई जगह जॉइनिंग से पहले उन्हें अपने पास मौजूद सभी सरकारी पत्रावलियां मूल पटल सहायक या बीएसए कार्यालय को वापस सौंपनी थीं।
बार-बार मांगने पर भी नहीं दी फाइलें: आरोप है कि पटल सहायक और विभाग के आला अधिकारियों द्वारा बार-बार लिखित और मौखिक रूप से मांगने के बावजूद अनुपम मिश्र ने पत्रावलियां वापस नहीं कीं। पुलिस का साफ कहना है कि अनुपम मिश्र ने महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज या तो जानबूझकर अपने पास रख लिए हैं या फिर उन्हें कहीं गायब कर दिया है।


शिक्षकों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मामले की भनक लगते ही जिला प्रशासन भी पूरी तरह सख्त हो गया। इस मुकदमे से ठीक पहले रात को ही सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार की अगुवाई में गठित एक विशेष टास्क फोर्स ने जिलाधिकारी के निर्देश पर सीधे बीएसए कार्यालय में औचक छापा मारा। रात के समय छापा मारने का मुख्य मकसद कार्यालय के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को चकमा देकर उनकी संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखना था।
इस छापेमारी के दौरान टीम ने गोदाम में रखी करीब डेढ़ सौ पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता की भी बारीकी से जांच की, हालांकि किताबों की गुणवत्ता में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई। कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रशासन को पहले ही कार्यालय में चल रही किसी बड़ी हेराफेरी का अंदेशा हो चुका था। फिलहाल पुलिस मामले की जांच तेजी से कर रही है और गायब पत्रावलियों को जल्द से जल्द बरामद करने का प्रयास किया जा रहा है।
Post Views: 37












Total views : 346517