
संसद में सोमवार को परिसीमन और एफसीआरए पर चर्चा होने की संभावना
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: संसद के वर्तमान सत्र के अंतिम दिनों में देश की राजनीति और चुनावी व्यवस्था को प्रभावित करने वाले कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर गहमागहमी बढ़ने के आसार हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, संसद के दोनों सदनों में देश के निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन करने, लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने तथा विदेशी चंदे को नियमित करने वाले महत्वपूर्ण विधेयकों पर विचार और चर्चा हो सकती है।


संसद के मानसून सत्र में सोमवार 10 अगस्त से अंतिम सप्ताह की कार्यवाही शुरु होगी, जिसमें को परिसीमन और एफसीआरए विधेयक पर चर्चा की संभावना को देखते हुए राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं। मसलन कांग्र्रेस के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन भी चर्चा में हिस्सेदारी लेने की तैयारी करते नजर आ रहा है। शायद इसीलिए कांग्रेस ने 10 से 12 अगस्त (सोमवार, मंगलवार और बुधवार) के बीच दोनों सदनों में संभावित महत्वपूर्ण विधेयकों और ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति के तहत कांग्रेस पार्टी ने अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के लिए तीन लाइन का सख्त व्हिप जारी किया है। यह तय माना जा रहा है कि दोनों सदनों में इस दौरान भारी गहमागहमी और जोरदार हंगामे के आसार बने हुए हैं।

सदन स्थगित होने तक अनिवार्य उपस्थिति रहने का निर्देश
राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि 10, 11 और 12 अगस्त 2026 को उच्च सदन में बेहद महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होनी तय है। व्हिप के मुताबिक, कांग्रेस के सभी राज्यसभा सदस्यों को इन तीनों दिनों में सुबह 11:00 बजे से लेकर सदन की कार्यवाही स्थगित होने तक अनिवार्य रूप से मौजूद रहना होगा। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी सांसद सदन में उपस्थित रहकर पार्टी के आधिकारिक रुख का पूर्ण समर्थन करें। इसी तरह का कड़ा निर्देश लोकसभा सदस्यों के लिए भी जारी किया गया है। केवल अपनी पार्टी ही नहीं, बल्कि कांग्रेस ने विपक्ष के साझा मोर्चे ‘इंडिया’ गठबंधन के सहयोगी दलों को भी एकजुट करने का प्रयास शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी नेताओं ने गठबंधन के सभी साथी दलों से संपर्क कर आग्रह किया है कि वे इन तीन दिनों में अपने-अपने सांसदों की 100 फीसदी उपस्थिति सुनिश्चित करें।
किन विधेयकों पर सियासी संग्राम की संभावना
विपक्ष की इस अचानक घेराबंदी के पीछे कुछ चर्चित और विवादास्पद विधेयकों को वजह माना जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्र सरकार अगले हफ्ते विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी एफसीआरए बिल को चर्चा व पारित कराने के लिए ला सकती है। इसके साथ ही परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर भी चर्चा की अटकलें तेज हैं। हालांकि, संसदीय कार्य राज्य मंत्री द्वारा दिए गए संभावित विधायी कामकाज के ब्योरे में इन विधेयकों का स्पष्ट उल्लेख नहीं था, लेकिन विपक्ष किसी भी स्थिति में जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
लोकसभा का आकार बढ़ाने का प्रस्ताव
परिसीमन संशोधन विधेयक के जरिए सरकार लोकसभा की वर्तमान में कुल सीटें 543 से बढ़कर 850 करने की तैयारी में है। इस प्रस्तावित बिल का फार्मूला ऐसा है जिससे सभी राज्यों की सीटों में लगभग 50 प्रतिशत तक की एकसमान वृद्धि की परिकल्पना की गई है, ताकि किसी भी क्षेत्र या राज्य का प्रतिनिधित्व कम न हो। खासबात है कि इन नई बढ़ी हुई सीटों के आधार पर संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33 प्रतिशत) सीटें आरक्षित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। इसे आगामी आम चुनावों (वर्ष 2029) से पहले लागू किए जाने की योजना पर विचार चल रहा है। वर्तमान स्थिति में इस बड़े बदलाव के लिए संविधान में संशोधन जरूरी है, जिसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता होगी। सरकार विभिन्न विपक्षी दलों और क्षेत्रीय ताकतों (जैसे डीएमके, सपा आदि) के साथ इस पर बातचीत और संवाद साध रही है। कुछ दल समान रूप से 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने और जनसँख्या नियंत्रण संबंधी शर्तों के साथ समर्थन पर विचार कर रहे हैं, जबकि कुछ ने इस पर अपनी आपत्तियां और शर्तें रखी हैं। विधेयक पर व्यापक राजनीतिक सहमति और विधायी मंजूरी मिलने के बाद ही सीटों के नए आवंटन की आधिकारिक और अंतिम अनुसूची लागू होगी।
क्या है परिसीमन बिल के प्रावधान
केंद्र सरकार ने संविधान संशोधन विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 (राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35) करने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव सभी राज्यों में लगभग 50 प्रतिशत सीटों की एकसमान बढ़ोतरी और महिला आरक्षण (33 प्रतिशत) को समय पर लागू करने के लिए लाया गया है। वर्तमान में इस पर राजनीतिक दलों के बीच चर्चा और आम सहमति बनाने की प्रक्रिया जारी है। इसे आगामी आम चुनावों (वर्ष 2029) से पहले लागू किए जाने की योजना पर विचार चल रहा है। इस बड़े बदलाव के लिए संविधान में संशोधन जरूरी है, जिसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता होगी। राजनीतिक रुख: सरकार विभिन्न विपक्षी दलों और क्षेत्रीय ताकतों जैसे डीएमके, सपा आदिके साथ इस पर बातचीत और संवाद साध रही है। कुछ दल समान रूप से 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने और जनसँख्या नियंत्रण संबंधी शर्तों के साथ समर्थन पर विचार कर रहे हैं, जबकि कुछ ने इस पर अपनी आपत्तियां और शर्तें रखी हैं।
एफसीआरए एफसीसआरए कानून में कड़ाई
देश में अवैध विदेशी चंदे पर कसने की दिशा में संसद में चर्चा के लिए आने वाले दूसरे प्रमुख विधेयक ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ में विदेशी धन प्राप्त करने वाली संस्थाओं के लिए कड़े प्रावधान किए जा रहे हैं। पूर्वानुमति मिलने के बाद तय समय सीमा में विदेशी फंड का उपयोग और उसका ब्योरा देना अनिवार्य होगा। लापरवाही पर पंजीकरण तुरंत निलंबित किया जा सकेगा। इसके तहत निलंबन या प्रमाणपत्र रद्द होने की स्थिति में संबंधित संस्था की चल-अचल परिसंपत्तियों के प्रबंधन हेतु विशेष व्यवस्था का प्रावधान है। वहीं अवैध तरीके से विदेशी धन लेने या उसमें सहयोग करने के मामलों में अधिकतम जेल की सजा को 5 वर्ष से घटाकर 1 वर्ष करने का प्रस्ताव है, जबकि आर्थिक जुर्माने का प्रावधान यथावत रहेगा।











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