
लोकपथ लाइव, विशेष संवाददाता। यदि माटी और प्रकृति के प्रति सच्चा प्रेम आपके अंतर्मन में जिंदा हो, तो बंजर और सूनी पड़ी जमीन पर भी गुलशन खिल उठते हैं। कुछ ऐसा ही अद्भुत और अनुकरणीय नजारा जिले की जानसठ तहसील के अंतर्गत आने वाले एक सरकारी स्कूल में देखने को मिल रहा है, जो इन दिनों समूचे क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण की एक बेहद खूबसूरत इबारत लिख रहा है।
पानीपत-खटीमा राज्यमार्ग स्थित सिखेड़ा का ‘पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय’ परिसर वहां तैनात प्रधानाध्यापिका रश्मि मिश्रा के जज्बे और अटूट लगन से न केवल हरियाली की चादर ओढ़े हुए है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की जीती-जागती मिसाल बनकर वहां अध्ययनरत नौनिहालों के मन में भी प्रकृति के प्रति अगाध प्रेमभाव जगा रहा है.
किताबों और नारों से आगे बढ़कर धरातल पर किया कार्य
इस सरकारी विद्यालय का कायाकल्प करने और इसे पर्यावरण की जीवंत पाठशाला बनाने का पूरा श्रेय प्रधानाध्यापिका रश्मि मिश्रा को जाता है। उन्होंने पर्यावरण के संदेश को केवल किताबों के पन्नों, रटने वाले पाठों और दीवारों पर लिखे नारों तक सीमित नहीं रखा। इसके बजाय उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से पूरे परिसर को प्रकृति के अनुपम और मनमोहक रंगों से सराबोर कर दिया है।
वर्तमान में शिक्षा विभाग में एसआरजी (SRG) जैसी महत्वपूर्ण और दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहीं रश्मि मिश्रा ने अपनी व्यस्तता के बीच भी स्कूल की सुंदरता से कभी समझौता नहीं किया. उन्होंने अपने निजी खर्च से विद्यालय की सूनी और उपेक्षित पड़ी खाली जमीन को एक बेहद खूबसूरत, हरे-भरे मैदान में तब्दील कर दिया है. आज उस जमीन पर मखमली हरी घास और दीवारों व ग्रिल पर लहराती बेलें स्कूल के सौंदर्य में चार चांद लगा रही हैं।
विद्यालय के मुख्य भवन और गलियारों को आकर्षक बनाने के लिए विभिन्न प्रजातियों के लगभग 100 से अधिक पौधों के गमले करीने से सजाए गए हैं। ये पौधे न केवल यहां आने वाले आगंतुकों और बच्चों की आंखों को सुकून देते हैं, बल्कि अपनी भीनी-भीनी खुशबू से पूरे वातावरण को चौबीसों घंटे महकाते रहते हैं।
इस अनूठे उपवन को हमेशा हरा-भरा, सुसज्जित और जीवित बनाए रखने के लिए प्रधानाध्यापिका ने एक और सराहनीय कदम उठाया है। रश्मि मिश्रा ने बताया कि सरकारी बजट का इंतजार किए बिना, उन्होंने पौधों की नियमित सिंचाई, कटाई और देखभाल के लिए अपने निजी खर्च (वेतन) पर एक स्थायी माली की भी व्यवस्था की हुई है।
“हम बच्चों को पर्यावरण बचाने के केवल किताबी उपदेश नहीं दे सकते। जब बच्चे रोज सुबह स्कूल आकर अपनी आंखों के सामने पौधों को पनपते और खिलते देखेंगे, तो प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव उनके भीतर अपने आप अंकुरित हो जाएगा।”
– रश्मि मिश्रा, प्रधानाध्यापिका व एसआरजी
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