
नए चुनाव होने तक मौजूदा प्रमुखों को ही सौंपी जाएगी कमान
लोकपथ लाइव, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था से जुड़ी इस वक्त की बड़ी खबर राजधानी लखनऊ से आ रही है। प्रदेश के सभी ब्लॉक प्रमुखों और क्षेत्र पंचायतों का पांच वर्षीय निर्वाचित कार्यकाल आज, 19 जुलाई को आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। कार्यकाल खत्म होने के साथ ही शासन स्तर पर प्रशासनिक शून्यता को रोकने के लिए तैयारियां मुकम्मल कर ली गई हैं। नई क्षेत्र पंचायतों के गठन और ब्लॉक प्रमुखों के आगामी चुनाव होने तक मौजूदा ब्लॉक प्रमुखों को ही ‘प्रशासक’ नियुक्त करने का फैसला लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, रविवार को ही इससे संबंधित शासनादेश जारी किया जा सकता है।


पंचायती राज विभाग ने पूरी की प्रक्रिया
लखनऊ स्थित शासन स्तर के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर ली है। चूंकि वर्तमान बोर्ड का समय आज पूरा हो चुका है, इसलिए विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए प्रशासकों की तैनाती अनिवार्य थी। सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए मौजूदा ब्लॉक प्रमुखों के अनुभव को प्राथमिकता दी है और नए चुनाव होने तक उन्हें ही वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सौंपने का मन बनाया है।

कामकाज पर नहीं पड़ेगा असर
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस व्यवस्था से ग्रामीण इलाकों में चल रहे विकास कार्यों की गति प्रभावित नहीं होगी। क्षेत्र पंचायतों में होने वाले निर्माण कार्य, वित्तीय स्वीकृतियां और अन्य जरूरी प्रशासनिक गतिविधियां सामान्य रूप से चलती रहेंगी।
जल्द जारी होगा आधिकारिक आदेश
रविवार की छुट्टी होने के बावजूद इस मामले की गंभीरता को देखते हुए फाइल को अंतिम रूप दे दिया गया है। आज शाम या देर रात तक इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होने की पूरी संभावना है। इस फैसले के बाद अब सभी निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख ही प्रशासक के तौर पर अपनी-अपनी क्षेत्र पंचायतों का कामकाज देखेंगे, जिससे गांवों के विकास से जुड़े प्रस्तावों और बजट आवंटन में कोई तकनीकी अड़चन नहीं आएगी।











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