
लोकपथ लाइव (मुजफ्फरनगर)। विकास भवन सभागार में गुरुवार को राज्य सूचना आयोग के राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम की अध्यक्षता में जन सूचना अधिकार (RTI) अधिनियम की प्रगति को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सूचना आयुक्त ने जनपद में RTI के अंतर्गत लंबित आवेदनों की स्थिति और उनके त्वरित एवं पारदर्शी निस्तारण के कार्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को समयबद्ध तरीके से सटीक सूचनाएं उपलब्ध कराना है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
सूचना आयुक्त ने विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि वे RTI नियमों का भली-भांति अध्ययन करें और आवेदकों को समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराएं, जिससे आमजन को आयोग के चक्कर न लगाने पड़ें। बैठक के दौरान बताया गया कि वर्तमान में जनपद में 162 मामले लंबित हैं, जिनका शीघ्र निस्तारण करने और कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरतने के आदेश दिए गए।
565 मामलों में लगा अर्थदंड, अधिकारियों को अनिवार्य उपस्थिति के निर्देश
समीक्षा के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि राज्य सूचना आयोग में जनपद से जुड़े 565 मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर पूर्व में अर्थदंड लगाया जा चुका है। इसमें से कई मामलों में वसूली की कार्रवाई पूरी हो चुकी है, जबकि शेष में प्रक्रिया जारी है। आयुक्त महोदय ने निर्देश दिए कि आयोग में सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी स्वयं या अपने अधिकृत सरकारी प्रतिनिधि के माध्यम से अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें।
बैठक से नदारद बीएसए और जिला समाज कल्याण अधिकारी को नोटिस
बैठक के दौरान बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहने पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। जिला समाज कल्याण अधिकारी कमलेश सिंह एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के उपस्थित न रहने पर मुख्य विकास अधिकारी ने दोनों अधिकारियों को तत्काल ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करने के निर्देश दिए।
इस समीक्षा बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) देश दीपक सिंह, नगर मजिस्ट्रेट दीपक कुमार पाल, एमडीए सचिव कुंवर बहादुर सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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