
लोकसभा महासचिव के रूप में दी थीं विशिष्ट सेवाएँ, 100 से अधिक पुस्तकों से किया पीढ़ियों का मार्गदर्शन
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: देश के प्रख्यात संविधान विशेषज्ञ, प्रखर विचारक और पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. सुभाष सी. कश्यप का निधन हो गया है। उनके देहावसान की खबर से देश के राजनीतिक, संवैधानिक और बौद्धिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। डॉ. कश्यप भारतीय संविधान और देश की संसदीय व्यवस्था के एक जीवंत थे। उन्होंने न केवल भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को बहुत करीब से देखा, बल्कि उसे आकार देने और जन-जन तक उसकी समझ पहुँचाने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनका जाना भारतीय संसदीय लोकतंत्र, संवैधानिक विमर्श और सार्वजनिक जीवन के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में असंभव है।


लोकसभा के महासचिव के रूप में दी सेवाएं
डॉ. सुभाष सी. कश्यप ने लोकसभा के महासचिव के रूप में एक लंबी, ऐतिहासिक और विशिष्ट सेवा देश को दी।सुभाष कश्यप का जन्म 10 मई 1929 को सुभाष कश्यप का जन्म 10 मई 1929 को संयुक्त प्रांत (वर्तमान उत्तर प्रदेश) के बिजनौर जिले के चांदपुर में एक स्वतंत्रता सेनानी परिवार में हुआ था। उन्होंने भारतीय संसद से जुड़ी तमाम जिम्मेदारियां संभाली। वे 1984 से 1990 तक 7वीं, 8वीं और 9वीं लोकसभा के महासचिव रहे। इस महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए उन्होंने संसदीय प्रक्रियाओं के सरलीकरण और उनके सुचारू संचालन में क्रांतिकारी भूमिका निभाई। वे देश के उन विरले विचारकों में शामिल थे, जिनका अध्ययन बेहद गहन और दृष्टि अत्यंत दूरदर्शी थी। उन्होंने संवैधानिक और संसदीय विषयों पर 100 से अधिक पुस्तकों की रचना की। उनकी लिखी पुस्तकें आज भी देश के कानूनविदों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं, सिविल सेवा के अभ्यर्थियों और आम नागरिकों के लिए मार्गदर्शिका का कार्य कर रही हैं। संसद, संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की बारीकियों को अत्यंत सरल भाषा में जन-जन तक पहुँचाने का जो भगीरथ प्रयास डॉ. कश्यप ने किया, उसे देश हमेशा आदरपूर्वक स्मरण रखेगा।

राष्ट्रसेवा, ज्ञान और नैतिक प्रतिबद्धता का उदाहरण
स्वतंत्रता आंदोलन की महान प्रेरणाओं और आदर्शों के बीच निर्मित डॉ. कश्यप का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, अगाध ज्ञान और उच्च नैतिक प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण था। देश की लोकतांत्रिक जड़ों को मजबूत करने के लिए वे आजीवन सक्रिय रहे। चाहे वह संसदीय प्रक्रियाओं और परंपराओं के क्रमिक विकास का मसला हो, जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने का कार्य हो, या फिर समय-समय पर संवैधानिक सुधारों को लेकर होने वाले उच्च स्तरीय विमर्श; डॉ. कश्यप ने हर भूमिका और हर मंच पर अपनी अद्वितीय विद्वता और दूरदृष्टि की अमिट छाप छोड़ी। उनकी इसी विलक्षण प्रतिभा के चलते उन्हें कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया, जिसमें भारत सरकार द्वारा दिया गया ‘पद्ध भूषण’ सम्मान प्रमुख है।
देशभर से मिल रही हैं भावभीनी श्रद्धांजलि
डॉ. सुभाष सी. कश्यप के निधन पर देशभर के राजनेताओं, न्यायविदों और प्रबुद्ध समाज ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। शिक्षा और कानून के क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि डॉ. कश्यप ने भारतीय लोकतंत्र की आत्मा (संविधान) को सहेजने और उसे नई पीढ़ी को सौंपने का जो ऐतिहासिक कार्य किया है, वह उन्हें हमेशा जीवंत रखेगा। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में उच्च स्थान प्रदान करें और इस गहरे संकट की घड़ी में उनके शोकाकुल परिवार, आत्मीय जनों तथा देश-विदेश में फैले उनके असंख्य प्रशंसकों को इस असहनीय दुःख को सहन करने का संबल और असीम शक्ति दें।











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