
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। तीन दशक से भी अधिक पुराने और बेहद संवेदनशील बहुचर्चित रामपुर तिराहा गोलीकांड से जुड़े ‘फर्जी हथियार बरामदगी’ मामले में आज अदालत ने एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष सीबीआई अदालत ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए तीन पूर्व पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने तत्कालीन एसएचओ (SHO) बृजकिशोर, तत्कालीन कांस्टेबल उमेश चंद और अनिल कुमार को डेढ-डेढ़ वर्ष के कड़े कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही तीनों दोषियों पर 21-21 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
शाम चार बजे अदालत ने मुकर्रर की सजा
विशेष सीबीआई अदालत के पीठासीन अधिकारी डी.के. फौजदार ने दोनों पक्षों की गवाहियों और लंबी कानूनी दलीलों को सुनने के बाद यह फैसला सुरक्षित रखा था। मंगलवार शाम करीब 4 बजे जैसे ही अदालत ने सजा का ऐलान किया, कोर्ट परिसर में हलचल तेज हो गई। मामले की आधिकारिक जानकारी देते हुए एडवोकेट अनुराग वर्मा ने मीडिया को बताया कि न्याय की इस लड़ाई में यह एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पड़ाव है।
आंदोलनकारियों को फंसाने के लिए रची गई थी ‘फर्जी कहानी’
यह पूरा प्रकरण वर्ष 1994 के उस काले अध्याय से जुड़ा है, जब पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर जा रहे आंदोलनकारियों पर रामपुर तिराहा पर गोलियां चलाई गई थीं। इसके बाद पुलिस ने आंदोलनकारियों पर ही फर्जी मुकदमे लादने के इरादे से उनके पास से कथित रूप से अवैध हथियार बरामद होना दिखाया था। इस पूरे मामले की जांच जब देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) को सौंपी गई, तो परतों के पीछे छिपा सच बाहर आया और पुलिस की यह बरामदगी पूरी तरह फर्जी पाई गई।
उत्तराखंड आंदोलन के इतिहास में न्याय की बड़ी जीत
रामपुर तिराहा कांड उत्तराखंड राज्य गठन के आंदोलन का सबसे दर्दनाक और संवेदनशील मोड़ रहा है। 32 वर्षों के लंबे इंतजार और विभिन्न अदालतों में चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर साबित किया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं। आंदोलनकारियों के परिजनों और उत्तराखंड समर्थकों ने इस फैसले को न्याय की एक बड़ी जीत बताया है।
*मुजफ्फरनगर: रामपुर तिराहा कांड में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट ब्रजकिशोर समेत तीन पुलिसकर्मी दोषी, सीबीआई जांच में खुली पुलिस की फर्जी कहानी – Lokpath Live*


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