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संसद का मानसून सत्र संपन्न: लोकसभा व राज्यसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, संसद में पास हुए एक दर्जन विधेयक

दोनों सदनों में विपक्ष के हंगामें के कारण लोकसभा की उत्पादकता 19 फीसदी और राज्यसभा की 39 फीसदी दर्ज हुई
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र का समापन हो गया है। इस सत्र के दौरान पहले दिन से ही समापन तक विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित रही, लेकिन सरकार की रणनीति के तहत दोनों सदनों में हंगामे के बीच ही कामकाज आगे बढ़ता रहा। इसी का नतीजा है कि संसद के दोनों सदनों से 12 विधेयकों को पारित कर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया। वहीं लोकसभा में विदेशी निवेश से जुडे एफसीआरए बिल को सरकार ने विपक्ष के विरोध के बीच संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी को भेजा है। गुरुवार को सत्र के आखिरी दिन भी विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे के बीच राज्यसभा ने ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के बाद मुहर लगा दी गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा में सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। वहीं इस सत्र के दौरान विपक्ष के हंगामे के कारण दोनों सदनों में कामकाज और उत्पादकता कम रही अर्थात लोक सभा की कुल उत्पादकता मात्र 19 प्रतिशत रही। जबकि राज्य सभा की उत्पादकता 39.17 प्रतिशत दर्ज हुई। इस सत्र में यह भी देखने को मिला कि पहली बार विपक्ष चर्चा से दूर रहा और पूरे सत्र के दौरान दोनों सदनों में हंगामा करता नजर आया।

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संसद के मानसून सत्र में 20 जुलाई से गुरुवार 13 अगस्त तक 19 बैठकें हुई। पहले दो सप्ताह में विपक्ष के हंगामे के कारण कोई खास विधायी कार्य नहीं हो पाया। लेकिन तीसरे सप्ताह में सरकार ने विपक्ष की रणनीति के जवाब में शायद हंगामे के बीच ही कामकाज को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। इसी कारण लोकसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को छोड़कर बाकी 11 विधेयक बिना किसी चर्चा के ही पारित किये गये। हालांकि उच्च सदन में सभी 12 विधेयक चर्चा के बाद पास हुए, जिनमें एनडीए के ही सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया। विपक्ष के हंगामे पर राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने चिंता जताते हुए विपक्ष का नसीहत भी दी। सत्र के समापन पर सभापति ने कहा कि हंगामे के कारण राष्ट्रीय महत्त्व के मुद्दों पर सार्थक चर्चा के कई कीमती घंटे नष्ट हुए, लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद सदन ने 12 महत्वपूर्ण विधेयकों पर विचार कर उन्हें पारित या वापस लेकर अपने मुख्य विधायती कर्तव्यों को पूरा किया। सभापति ने सदस्यों को याद दिलाया कि ‘हाउस ऑफ़ एल्डर्स’ (वरिष्ठों का सदन) होने के नाते राज्यसभा की यह विशेष जिम्मेदारी है कि वह तर्कपूर्ण बहस, गरिमापूर्ण असहमति और सोच-समझकर कानून बनाने की परंपरा को बनाए रखे। इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया।

संसद ने इन विधेयको को दी मंजूरी
संसद के मानसून सत्र मे विपक्ष के हंगामे के बावजूद 12 प्रमुख विधेयकों पर पर दोनों सदनों में मुहर लगी है। इन प्रमुख विधेयकों में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक , केरल (नाम में परिवर्तन) विधेयक, कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, .बैंकर्स बुक एविडेंड(संशोधन) विधेयक, सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक शामिल हैं। इनमें लोकसभा में 12 बिलों में से 11 विधेयकों को हंगामे के बीच बिना चर्चा के राज्यसभा को भेजे गये। जबकि राज्यसभा में सभी 12 विधेयक चर्चा के बाद पारित किये गये।

विपक्ष ने बिरला की चाय पार्टी का किया बहिष्कार
लोकसभा का मानसून सत्र गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने परंपरा के अनुसार चाय पार्टी का आयोजन किया। शायद ऐसा पहली बार हुआ कि इस पंरपरा को तोड़ते हुए विपक्षी दलों कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया। हालांकि, डीएमके नेता कनिमोझी चाय पार्टी में शामिल हुईं। वहीं राज्यसभा में विपक्षी नेताओं ने सभापति सीपी राधाकृष्णन की ओर से आयोजित चाय पार्टी में हिस्सा लिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी कार्यक्रम में शामिल हुईं। गौरतलब है कि पूरे सत्र के दौरान बार-बार हंगामा हुआ। विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। विरोध प्रदर्शनों के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार रोकनी पड़ी। नीट से जुड़ी कथित गड़बड़ियों, दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस की कार्रवाई और राम मंदिर चढ़ावे समेत कई मुद्दों को लेकर हंगामा हुआ।

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