
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। शासन की मंशा के अनुरूप शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत वंचित और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा दिलाने की प्रक्रिया में रोड़ा अटकाने वाले निजी स्कूलों पर जिला प्रशासन ने नकेल कसनी शुरू कर दी है। ऑनलाइन लॉटरी में सीट आवंटित होने के बाद भी कक्षा एक में प्रवेश देने में टालमटोल और अभिभावकों के उत्पीड़न की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) संदीप कुमार ने जनपद के पाँच प्रमुख स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।


बीएसए कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जिन स्कूलों को नोटिस थमाया गया है उनमे ग्रेन चैंबर पब्लिक स्कूल, सूर्यदेव पब्लिक स्कूल,सिल्वर ओक पब्लिक स्कूल, पीनना, नींव इंटरनेशनल स्कूल सहित एक अन्य स्कूल शामिल है।

बीएसए संदीप कुमार ने बताया कि विभाग को लगातार अभिभावकों की ओर से लिखित और मौखिक शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। आरोप है कि जब अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला कराने स्कूल पहुँच रहे हैं, तो उन्हें घंटों प्रतीक्षा कराई जा रही है। स्कूल प्रबंधन द्वारा ‘तकनीकी खामी’ का बहाना बनाकर उन्हें वापस भेजा जा रहा है।
इतना ही नहीं, कुछ मामलों में स्कूलों द्वारा उन दस्तावेजों की मांग की जा रही है जो आरटीई की नियमावली में अनिवार्य नहीं हैं। सबसे गंभीर मामला ‘अवैध शुल्क’ की मांग का सामने आया है, जिसे लेकर अभिभावकों ने मानसिक उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। बीएसए ने सख्त लहजे में कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी पात्र बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। नोटिस का संतोषजनक उत्तर न मिलने पर संबंधित स्कूलों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई और मान्यता रद्द करने जैसी अनुशंसा भी की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, विभाग अब उन अन्य स्कूलों की भी गुप्त सूची तैयार कर रहा है जिनके खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही हैं। जाँच के घेरे में जनपद के कई अन्य बड़े स्कूल भी आ सकते हैं।












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