Select Language :

Home » राजनीति » दिल्ली पुलिस में बगावत! दो अधिकारियों के तबादले के खिलाफ पुलिसकर्मियों का मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन, अमित शाह की बढ़ी मुश्किलें

दिल्ली पुलिस में बगावत! दो अधिकारियों के तबादले के खिलाफ पुलिसकर्मियों का मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन, अमित शाह की बढ़ी मुश्किलें

पुलिस मुख्यालय में पुलिस आयुक्त ने पुलिसकर्मियों के साथ की बैठक
(उमाकांत लखेड़ा)
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस मुख्यालय में सोमवार को पुलिसकर्मियों का जोरदार विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। पूर्वी दिल्ली में तैनात एक एसीपी और एक इंस्पेक्टर को कथित तौर पर वकीलों के दबाव में गैर-कार्यात्मक इकाइयों में स्थानांतरित किए जाने के विरोध में पुलिसकर्मी मुख्यालय में जुटे। इस घटनाक्रम को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए बड़ी असहज स्थिति के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी की कानून-व्यवस्था सीधे उनके मंत्रालय के अधीन आती है।

How to Make a News Portal

दिल्ली पुलिस और नागरिक समाज, युवाओं तथा वकीलों के बीच टकराव की स्थिति जून में शुरू हुए जनविरोध प्रदर्शनों के बाद से लगातार बढ़ती रही है। आरोप है कि केंद्र शासित प्रदेश की राजधानी में आंदोलनों और प्रदर्शनों से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस को सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए गए थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देशों के परिणामस्वरूप पुलिस की कथित बर्बरता के कई मामले सामने आए, जिनमें महिला प्रदर्शनकारियों के साथ छेड़छाड़ के आरोप भी शामिल हैं। प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को अनुचित बताते हुए कहा कि इससे पुलिस बल का मनोबल प्रभावित होगा।

पुलिस बल के इतिहास की एक अभूतपूर्व घटना
वहीं, शीर्ष सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि इन अधिकारियों के कथित दंडात्मक तबादले का आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय की दिल्ली पुलिस आयुक्त को दी गई सलाह के बाद आया था। वर्दीधारी पुलिस बल के सदस्यों द्वारा इस तरह खुले तौर पर विरोध प्रदर्शन करना एक गंभीर अनुशासनात्मक अवज्ञा माना जा रहा है। इसे सरकार के प्रति असम्मान के रूप में भी देखा जा रहा है। रिपोर्ट लिखे जाने तक प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों को शांत करने और स्थिति को संभालने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे थे। दोपहर बीतने के साथ ही तनाव बढ़ता गया। नाराज पुलिसकर्मियों ने पुलिस मुख्यालय के भीतर धरना शुरू कर दिया और अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी पुलिस एकता के समर्थन में नारे लगाते रहे, जबकि वरिष्ठ अधिकारी स्थिति को संभालने में असहाय नजर आए। बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस के इतिहास में यह पहला ऐसा मामला है, जब पुलिसकर्मी मुख्यालय के भीतर दाखिल होकर उसके परिसर में इस तरह खुले तौर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। स्थिति गंभीर होने के बाद दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और सभी विशेष पुलिस आयुक्तों को प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों की शिकायतें सुनने के लिए बैठक बुलानी पड़ी। इसे पुलिस बल के इतिहास की एक अभूतपूर्व घटना बताया जा रहा है।

पुलिसकर्मियें ने खुलकर जाहिर की अपनी नाराजगी
यह बैठक पुलिस मुख्यालय स्थित आदर्श ऑडिटोरियम में आयोजित की गई, जो कुछ ही देर में पूरी तरह भर गया। विभिन्न जिलों से पुलिसकर्मी लगातार वहां पहुंचते रहे। इनमें से कई पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में थे और उन्होंने बैठक के दौरान खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। मीडिया कर्मियों को पुलिस मुख्यालय परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और कई विशेष पुलिस आयुक्त मंच पर मौजूद रहे और उन्होंने प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों से बातचीत करने की कोशिश की। विभिन्न जिलों से पुलिसकर्मियों का मुख्यालय पहुंचना जारी रहा। वरिष्ठ अधिकारी इस बात को लेकर असमंजस में दिखाई दिए कि स्थिति को कैसे नियंत्रित किया जाए। प्रदर्शनकारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की संभावना के बावजूद वे अधिकारियों के निर्देशों को मानने के लिए तैयार नहीं दिखे। बैठक में पुलिसकर्मियों ने बारी-बारी से अपनी बात रखी और वकीलों के कथित व्यवहार तथा अपने साथियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर नाराजगी जताई। दिन चढ़ने के साथ प्रदर्शन ने और व्यापक रूप ले लिया। बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मी भी इस आंदोलन में शामिल हो गईं। यह विरोध प्रदर्शन तीस हजारी कोर्ट परिसर में हुई हिंसा के बाद सामने आया है। इसे दूसरी ऐसी घटना बताया जा रहा है, जब दिल्ली पुलिस के जवानों ने अपने अधिकारों और सम्मान के लिए सड़कों पर उतरकर विरोध जताया है। हालांकि, इस बार प्रदर्शन सीधे पुलिस मुख्यालय के भीतर हुआ। प्रदर्शन जारी रहने के दौरान पुलिस मुख्यालय के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई। प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की और अपने साथियों के खिलाफ कथित एकतरफा कार्रवाई रोकने की अपील की। पुलिस विभाग के भीतर इस अभूतपूर्व प्रदर्शन से काफी बेचैनी का माहौल पैदा हो गया।

पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार एसीपी मानसवी वशिष्ठ ने रखी कई मांगें
इन मांगों में प्रमुख रूप से यह शामिल था कि वकीलों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस न लिया जाए और मामले में बार काउंसिल के एक सदस्य का नाम भी न हटाया जाए। उन्होंने यह मांग भी रखी कि सोमवार के प्रदर्शन में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न की जाए। बताया जाता है कि एसीपी मानसवी वशिष्ठ ने यहां तक कहा कि यदि विभाग प्रदर्शन के सिलसिले में कोई कार्रवाई करना चाहता है, चाहे वह निलंबन हो या कोई अन्य कठोर कदम, तो वह कार्रवाई केवल उनके खिलाफ की जाए। हालांकि, बातचीत का पहला दौर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। इसके बाद नाराज पुलिसकर्मी ऑडिटोरियम से बाहर निकल गए। कुछ ही देर बाद बातचीत का दूसरा दौर शुरू होने की संभावना की खबरें सामने आईं। दिल्ली पुलिस को देश के अनुशासित पुलिस बलों में गिना जाता है। लेकिन इस पूरे मामले को लेकर पुलिसकर्मियों में नाराजगी इस कदर बढ़ गई है कि वे पुलिस आयुक्त और अन्य वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के निर्देशों को भी मानने के लिए तैयार नहीं दिखाई दे रहे हैं।

Share this post:

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

खबरें और भी हैं...

वोट करें

[democracy id="1"]

Our Visitor

1 7 9 3 0 4
Total views : 447452

Follow us on