
लोकपथ लाइव, गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद के रिहायशी इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रही हजारों अवैध फैक्ट्रियों ने आम जनता का जीना दूभर कर दिया है। इन अवैध इकाइयों से निकलने वाली जहरीली गैसों और रसायनों के कारण लोगों को सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। हैरानी की बात यह है कि जहां फैक्ट्रियों की संख्या हजारों में है, वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासन ने पिछले सात महीनों में केवल 82 इकाइयों को सील कर औपचारिकता निभाई है।


आवासीय कॉलोनियां बनीं इंडस्ट्रियल हब

शहर की घनी आबादी वाली कॉलोनियों में गुपचुप तरीके से चल रही इन फैक्ट्रियों में लोहे की ढलाई, केमिकल प्रोसेसिंग और प्लास्टिक और लोहा पिंघलाने व जलाने जैसे काम हो रहे हैं। मानकों के विपरीत संचालित इन फैक्ट्रियों के पास न तो चिमनियां हैं और न ही फिल्टर। नतीजतन, शाम होते ही इन इलाकों की हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच जाती है, जिससे बच्चे और बुजुर्ग दमा व सांस की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
पिछले कुछ महीनों की कार्रवाई: प्रदूषण बोर्ड के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले सात महीनों में सीलिंग का जो आंकड़ा सामने आया है, वह जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। रिकार्ड में कुल सीलिंग कार्रवाई 82 फैक्ट्रियां पर हुई है। वहां अवैध इकाइयों का अनुमान 5000 से अधिक है। इस धीमी रफ्तार पर स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब तक बड़ी कार्रवाई नहीं होती, तब तक इन अवैध संचालकों के हौसले बुलंद रहेंगे।
अधिकारियों का पक्ष
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी अंकित सिंह का कहना है कि वे लगातार अभियान चला रहे हैं। आगामी दिनों में फिर से जिला प्रशासन और पुलिस बल के साथ मिलकर एक बड़ा संयुक्त अभियान चलाया जाएगा, जिसमें किसी भी अवैध इकाई को बख्शा नहीं जाएगा।
सात महीनों की कार्रवाई का संक्षिप्त विवरण
| श्रेणी | विवरण |
| कुल चिन्हित क्षेत्र | लोनी, साहिबाबाद, खोड़ा, और विजय नगर |
| कार्रवाई | 82 फैक्ट्रियां |
| प्रमुख उल्लंघन | बिना एनओसी, धुआं शोधन यंत्र का अभाव, अवैध विद्युत कनेक्शन |
| आगामी लक्ष्य | 200+ अवैध इकाइयों पर रेड की तैयारी |












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