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मेरठ में पकड़ी गई ‘फर्जी पुलिस चौकी’: फर्जी एसएचओ और दरोगा गिरफ्तार, इंस्टाग्राम से शिकार फंसाकर वसूलते थे रंगदारी

हथकड़ी, पिस्टल और तौलिए से पैर बांधकर देते थे गोली मारने की धमकी, एक माह में लाखों के लेनदेन का खुलासा
लोकपथ लाइव, मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली और खाकी के खौफ को ठेंगा दिखाते हुए शातिरों का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसे सुनकर खुद पुलिस महकमा सन्न रह गया। टीपीनगर थाना क्षेत्र के मोहकमपुर इलाके में सीओ ब्रह्मपुरी कार्यालय से महज एक किलोमीटर की दूरी पर बेखौफ तरीके से एक ‘अवैध पुलिस चौकी’ का संचालन किया जा रहा था। यहाँ खुद को सीओ, थानाध्यक्ष और दरोगा बताने वाले फर्जी पुलिसकर्मी लोगों को इंस्टाग्राम के जरिए अपने जाल में फंसाते थे और फिर फर्जी दफ्तर में बंधक बनाकर एनकाउंटर की धमकी देकर लाखों रुपये की रंगदारी वसूलते थे। ब्रह्मपुरी पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस गिरोह का पर्दाफाश किया है और फर्जी एसएचओ राहुल पाल व फर्जी दरोगा आकाश को गिरफ्तार कर लिया है। मौके से वारदात में इस्तेमाल की जाने वाली सफेद अल्टो कार, हथकड़ी, फर्जी दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है।

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कार में आंख पर पट्टी, हाथ में हथकड़ी: डेयरी संचालक को बनाया निशाना
इस सनसनीखेज रैकेट की परतें तब खुलीं जब एक पीड़ित डेयरी संचालक ने साहस जुटाकर ब्रह्मपुरी पुलिस स्टेशन में अपनी आपबीती सुनाई। पीड़ित डेयरी संचालक के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर उसकी बातचीत ‘शशांक शर्मा’ नाम के युवक से होती थी। 30 जुलाई की शाम शशांक ने उसे शॉप्रिक्स मॉल के सामने एक सुनसान सड़क पर मिलने बुलाया। जैसे ही पीड़ित वहाँ पहुँचा, पहले से घात लगाए बैठे 4-5 बदमाशों ने उस पर हमला कर दिया और जबरन एक सफेद अल्टो कार में ठूंस लिया। बदमाशों ने पीड़ित की आँखों पर पट्टी बाँध दी, हाथों में हथकड़ी पहनाई और कार की सीट के नीचे दबाकर रास्ते भर मारपीट करते रहे। कार में बैठे आरोपी एक-दूसरे को ‘सीओ साहब’ और ‘एसओ साहब’ कहकर संबोधित कर रहे थे ताकि पीड़ित पर पुलिस का खौफ कायम हो सके।

तौलिया बांधकर पिस्टल तानी, एनकाउंटर करने की धमकी
अपहर्ताओं ने पीड़ित को खुद को सिविल लाइंस थाने की पुलिस बताया और आरोप लगाया कि “तुम इंस्टाग्राम पर शशांक का शोषण कर रहे हो।” इसके बाद वे उसे मोहकमपुर स्थित अपने गुप्त ‘कार्यालय’ ले गए। फर्जी दफ्तर में ले जाकर बदमाशों ने पीड़ित का फोन छीना, गूगल पे (Google Pay) का पासवर्ड लिया और बाकायदा एक रजिस्टर में उसका नाम-पता दर्ज कर वीडियो बनाया। इसके बाद आरोपी राहुल पाल ने पीड़ित के पैर में तौलिया लपेटा, उस पर पिस्टल तान दी और धौंस जमाते हुए कहा कि 2 लाख रुपये दे, नहीं तो पैर में गोली मारकर एनकाउंटर की कहानी बना देंगे। डर के मारे पीड़ित ने किसी तरह अपने पड़ोसी से 10 हजार रुपये ऑनलाइन मंगवाकर आरोपी राहुल पाल के खाते में ट्रांसफर किए। बाकी के 90 हजार रुपये के लिए उसने अपनी दो भैंसें बेचने का बहाना बनाया।

गैस गोदाम मालिक की सतर्कता से खुली पोल
अगली सुबह आरोपी राहुल और आकाश पीड़ित को बाइक और कार से भैंस बेचने के लिए उसके जानकार के पास ले जाने लगे। रास्ते में वे मनीष सिंह के ‘गैस गोदाम’ पर रुके। यहाँ जब बातचीत शुरू हुई तो मनीष सिंह को तथाकथित दरोगा (आकाश) के पहनावे और हाव-भाव पर शक हुआ। मनीष ने जब कड़ाई से सवाल-जवाब करना शुरू किया और पहचान पत्र मांगा, तो फर्जी दरोगा घबरा गया और पीड़ित को छोड़कर मौके से बाइक से रफूचक्कर हो गया। इसके बाद मामला पुलिस के पास पहुँचा।

इलाके में रुतबा, असली पुलिसकर्मियों के साथ वायरल फोटो
स्थानीय निवासियों और अमर उजाला की पड़ताल में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी राहुल पाल ने करीब एक साल पहले मोहकमपुर में प्लॉट खरीदा था और तीन महीने पहले ही मकान-दफ्तर बनाकर फर्जी पुलिस चौकी का ढांचा खड़ा किया था। आस-पास आती थी चीखें: पड़ोसियों ने दबी ज़बान में बताया कि अक्सर उस दफ्तर से लोगों के पिटने की आवाजें आती थीं, लेकिन आरोपी खुद को रसूखदार ‘मीडियाकर्मी’ और पुलिस अधिकारियों का करीबी बताता था, इसलिए कोई बोलने की हिम्मत नहीं करता था। असली खाकी पर सवाल: राहुल पाल के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर असली पुलिसकर्मियों के साथ उसकी तस्वीरें और रील्स वायरल हैं। उसके दफ्तर पर भी कई पुलिसकर्मियों का आना-जाना था। पुलिस अधिकारी अब इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या इसमें स्थानीय पुलिस की कोई मिलीभगत थी।

लड़कियों और लड़कों दोनों की आवाज में ‘हनीट्रैप’
पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह इंस्टाग्राम पर बेहद शातिराना ढंग से काम करता था। ये लड़कों और लड़कियों दोनों तरह के प्रोफाइल बनाकर लोगों को फंसाते थे। लड़कों को फंसाने के लिए आरोपी खुद लड़कियों की आवाज में बात करते थे। गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों की जांच में महज एक महीने के भीतर 3 लाख रुपये से अधिक का संदिग्ध लेन-देन मिला है। इससे आशंका जताई जा रही है कि गिरोह ने अब तक दर्जनों लोगों को ब्लैकमेल कर लाखों की चपत लगाई है। फिलहाल ब्रह्मपुरी पुलिस पूरे रैकेट के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।

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