
नीट लीक, राम मंदिर चढ़ावे में कथित हेराफेरी और जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज के मुद्दों पर विपक्ष आक्रामक
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के शुरुआती 10 दिनों की कार्यवाही पूरी तरह से राजनीतिक खींचतान, भारी हंगामे और गतिरोध की भेंट चढ़ गई है। सत्र के शुरू होने से लेकर 10वें दिन तक संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभामें न तो सुचारू रूप से प्रश्नकाल चल सका और न ही शून्यकाल में जनहित के विषयों पर विस्तार से चर्चा हो सकी।


एक तरफ जहां विपक्षी दलों ने नीट पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर के दान व चढ़ावे में कथित गबन और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस बल प्रयोग जैसे मुद्दों को लेकर संसद के भीतर और बाहर सरकार को चौतरफा घेरने का काम किया, वहीं दूसरी ओर सरकार ने विपक्ष के तीखे विरोध और नारेबाजी के बीच ही ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ सहित कुछ अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करा लिया।

इन मुद्दों पर गरमाया रहा संसद का माहौल
सत्र के पहले दिन से ही विपक्ष ने देश भर के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े नीट पेपर लीक मामले पर कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर तत्काल चर्चा कराने की मांग की। विपक्ष का आरोप है कि सरकार शिक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार और पेपर लीक माफिया पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल रही है।
अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित ‘लूट’ का आरोप
सपा और अन्य विपक्षी दलों ने अयोध्या में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान और चढ़ावे में बड़े पैमाने पर धांधली का मुद्दा उठाया। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं को रसीदें नहीं दी जा रही हैं, दान पेटियों के पैसे गायब किए जा रहे हैं और सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई है। उनका आरोप है कि यह पैसा सत्तारूढ़ दल और उससे जुड़े संगठनों से जुड़े लोगों के खातों में जा रहा है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर बल प्रयोग
नीट मामले और अन्य मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग और लाठीचार्ज का मुद्दा भी संसद में जोर-शोर से गूंजा। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र और युवाओं की आवाज पर हमला करार दिया।
राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस
सदन के भीतर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयानों को लेकर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा लाए गए विशेषाधिकार हनन के नोटिस ने आग में घी का काम किया। टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद सहित विपक्षी नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि विशेषाधिकार प्रस्ताव तो मंत्रियों और सरकार के खिलाफ लाया जाना चाहिए, जो अपनी मर्जी से सदन चला रहे हैं।
संसद परिसर से लेकर सड़क तक विपक्ष का घेराव
सदन की कार्यवाही बाधित होने के साथ-साथ विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष और मकर द्वार पर लगातार प्रदर्शन किया। सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर, सांकेतिक दान पेटी रखकर और नारेबाजी कर सरकार विरोधी तेवर दिखाए। जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन को भी विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं का समर्थन मिला, जिससे मामला संसद से सड़क तक गर्म रहा।
हंगामे के बीच विधायी कार्य: पारित हुए कई विधेयक
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026: सत्र के 10वें दिन लोकसभा ने विपक्ष की नारेबाजी के बीच ही इस बिल को पारित किया। इसके तहत अब 2 साल से अधिक देरी से जन्म या मृत्यु दर्ज कराने पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा, गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय से जुड़े अन्य संशोधन विधेयकों को भी बिना विस्तृत चर्चा के ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई।
मानसून सत्र के पहले 10 दिनों का लेखा-जोखा
सत्र के कुल कार्यदिवस: 10 दिन
प्रश्नकाल व शून्यकाल की स्थिति: लगातार हंगामे के कारण बाधित और बार-बार स्थगित
प्रमुख विपक्षी मुद्दे: नीट पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा विवाद, जंतर-मंतर लाठीचार्ज
मुख्य पारित विधेयक: ‘लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026’ , प्रिवेंशन ऑफ इनसल्ट्स ऑफ नेशनल ऑनर अमेंडमेंट बिल 2026(वंदे मातरम् बिल) एवं जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026
दोनों सदनों की वर्तमान स्थिति : सोमवार (3 अगस्त) सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित
आरोप-प्रत्यारोप: सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (सत्ता पक्ष का रुख):यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष देश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों और विधेयकों पर सार्थक चर्चा से भाग रहा है। जनता ने सांसदों को सदन में देशहित के मुद्दों पर संवाद और कानून बनाने के लिए भेजा है, लेकिन विपक्ष सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए कार्यवाही में बाधा डाल रहा है।
धर्मेंद्र यादव व कीर्ति आजाद (विपक्ष का रुख): सरकार संवेदनशील मुद्दों जैसे युवाओं के भविष्य, राम मंदिर के नाम पर हो रही लूट और बेरोजगारी पर जवाब देने से डर रही है। जब हम इन गंभीर विषयों पर चर्चा की मांग करते हैं, तो हमारी आवाज को दबाया जाता है और एकतरफा तरीके से बिना चर्चा के बिल पास कराए जा रहे हैं।
आगे की राह
10 दिनों के लगातार गतिरोध के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही सोमवार, 3 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। हालांकि, जिस तरह से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट और अविश्वास की खाई चौड़ी हुई है, उसे देखते हुए सत्र के शेष दिनों में भी शांतिपूर्ण कामकाज होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।












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