
कड़े कानूनों के दायरे में आई मॉब लिंचिंग, देश के खिलाफ साजिश पर सजा का प्रावधान
LP Live, New Delhi: देश में आपराधिक मामलों को लेकर केंद्र सरकार द्वारा अंग्रेजी हुकूमत के जिन तीन आराधिक कानूनों में संशोधन करके नए प्रभावी और कड़े प्रावधान किये हैं, उन्हें भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के रुप में सोमवार लागू कर दिया गया है।
संसद के दोनों सदनों लोकसभा में 20 दिसंबर और राज्यसभा में 21 दिसंबर को इन तीनों नए कानूनों को मंजूरी दी गई थी और पिछले साल 25 दिसंबर को राष्ट्रपति ने इन नए कानूनों मंजूरी दी थी। ये नए कानून देश में ब्रिटिश राज से चले आ रहे इंडियन पीनल कोड (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और एविडेंस एक्ट की जगह ले रहे हैं।अंग्रेजी शासन के इन कानूनों में पीड़ितों को न्याय मिलने में अरसे बीत जाते थे, लेकिन अब पीड़ितों को सस्ता और सुलभ तथा समय सीमा से न्याय मिलने की संभावनाएं बढ़ी हैं। वहीं अपराध करने वाालों पर भी अंकुश कसना संभव होगा।

कई धाराएं बदली और कई निरस्त
गृह मंत्रालय के अनुसार नए कानून में बलात्कार के लिए धारा 375 और 376 की जगह धारा 63 लागू होगी। जबकि सामूहिक बलात्कार की धारा 70 होगी। हत्या के लिए अब धारा 302 की जगह धारा 101 होगी। भारतीय न्याय संहिता में 21 नए अपराधों को जोड़ा गया है, जिसमें एक नया अपराध मॉब लिंचिंग का भी प्रावधान शामिल है। इसके अलावा 41 विभिन्न अपराधों में सजा बढ़ाई गई है, तो 82 अपराधों में जुर्माना बढ़ाया गया है। वहीं 25 अपराध ऐसे हैं, जिनमें न्यूनतम सजा की शुरुआत हुई और छह अपराधों में सामुदायिक सेवा को दंड के रूप में स्वीकार किया गया है और 19 धाराओं को निरस्त किया गया है। इसमें राजद्रोह कानून के अंग्रेजी प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है। सरकार के खिलाफ कोई भी बोल सकता है, लेकिन देश के खिलाफ अब नहीं बोल सकते हैं। देश के खिलाफ बोलने या साजिश करने पर सजा का प्रावधान किया गया है।
तय समय में जमा होगी चार्जशीट
मंत्रालय के मुताबिक इसी प्रकार भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अंतर्गत 170 धाराएं होंगी। इसमें कुल 24 धाराओं में बदलाव हुए हैं और नई धाराएं और उपाधाराए जोड़ी गई हैं। माना जा रहा है कि इन नए कानून लागू होने से न्याय जल्दी मिलेगा और तय समय के अंदर चार्जशीट फाइल हो सकेगी। साक्ष्य जुटाने के लिए 900 फॉरेंसिक वैन देशभर के 850 पुलिस थानों के साथ जोड़ी जा रही हैं, ताकि गरीबों के लिए न्याय सस्ता हो सके। इसी प्रकार से तीसरे कानून के रूप में लागू नागरिक सुरक्षा संहिता में नौ धाराएं और 39 नए उपधाराएं जोडी गई हैं। जबकि इसमें नई व्याख्याएं और स्पष्टीकरण जोड़े हैं और 14 धाराओं को निरस्त किया है।
