Select Language :

Home » अंतर्राष्ट्रीय » हिंदी को समर्पित भारत-नेपाल मैत्री का नया आयाम ‘संपूर्ण’

हिंदी को समर्पित भारत-नेपाल मैत्री का नया आयाम ‘संपूर्ण’

✍️ दिनेश शर्मा ‘दिनेश’

How to Make a News Portal
भाषाएं केवल सूचनाओं के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं होतीं; वे संस्कृतियों को जोड़ने वाले वे जीवंत सेतु होती हैं, जिन पर चलकर दो देशों के नागरिक एक-दूसरे के हृदयों तक पहुंचते हैं। जब बात हिंदी की हो, तो यह केवल एक भाषा मात्र नहीं रह जाती, बल्कि यह करोड़ों लोगों की भावनाओं, सद्भाव और सांस्कृतिक अस्मिता का वह स्पंदन है, जिसने पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को एक विशेष एकता और भ्रातृत्व के सूत्र में पिरोया है। सदियों से इस भाषा ने न केवल साहित्य को समृद्ध किया है, बल्कि लोक-व्यवहार और संपर्क की सबसे सहज कड़ी बनकर समाज को एकजुट भी रखा है।

भारतीय इतिहास के पन्नों में 14 सितंबर 1949 का दिन स्वर्णाक्षरों में अंकित है। इसी दिन भारतीय संविधान ने हिंदी को राजभाषा के रूप में अंगीकार किया था। आज हिंदी न केवल राजभाषा के रूप में बल्कि संपर्क भाषा के रूप में भी अपनी एक सशक्त पहचान बना चुकी है। उस कालखंड में हिंदी के समक्ष एक नवोदित राष्ट्र को भाषाई और भावनात्मक स्तर पर एकताबद्ध करने का एक महान ऐतिहासिक अवसर था। राजभाषा के रूप में हिंदी की उस ऐतिहासिक उद्घोषणा से लेकर आज के आधुनिक संचार युग तक की यात्रा अत्यंत प्रगतिशील और प्रेरणादायी रही है। टंकण-यंत्रों की खटपट से शुरू होकर यह यात्रा संगणक (कंप्यूटर) के कुंजीपटल और अब अंतरजाल (इंटरनेट) तथा आधुनिक दूरभाष यंत्रों (मोबाइल) के स्पर्श-पटल तक पहुंच चुकी है। हिंदी ने समय और तकनीकी के हर सांचे में स्वयं को ढालकर यह सिद्ध कर दिया है कि वह सरकारी कार्यालयों की संचिकाओं, समृद्ध साहित्य और समाज में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखने के साथ-साथ, विश्व पटल पर भी एक सशक्त और जीवंत संपर्क माध्यम के रूप में स्थापित हो चुकी है।

हिंदी की यह गौरवशाली विकास यात्रा और इसका प्रभाव अब राजनीतिक सीमाओं से परे जाकर वैश्विक पटल पर छा रहा है। यही कारण है कि केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अन्य देशों में भी हिंदी के पठन-पाठन, प्रचार-प्रसार तथा उपयोग को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है। इसका सबसे सुंदर और प्रत्यक्ष उदाहरण हमारा निकटतम मित्र राष्ट्र नेपाल है। भारत के मित्र देशों में शामिल पड़ोसी देश नेपाल में हिंदी बोलने, समझने और उपयोग करने वालों की अत्यधिक संख्या है। नेपाल में हिंदी का प्रचलन दशकों और सदियों से चला आ रहा है। भारत और नेपाल के भाषाई संबंध अत्यंत प्रगाढ़ हैं, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि नेपाली भाषा को भारतीय संविधान की 22 मान्य भाषाओं की अनुसूची में शामिल किया गया है। वहीं दूसरी ओर, नेपाल के हिंदी विद्वान भारत में कई क्षेत्रों में अत्यंत उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। पशुपतिनाथ से लेकर काशी विश्वनाथ तक और जनकपुर से लेकर अयोध्या तक, दोनों देशों की साझा विरासत एक ही है। हाल ही में अन्नपूर्णा संचार समूह के एक परिचयात्मक चलचित्र (प्रमोशनल वीडियो) में भारत के प्रधानमंत्री के वक्तव्य के माध्यम से इसी आत्मीयता को बहुत सुंदरता से रेखांकित किया गया है, जहाँ वे नेपाल को भारत का एक अंतरंग और घनिष्ठ मित्र बताते हैं। इस प्रगाढ़ मैत्री को और अधिक जीवंत बनाने में हिंदी लंबे समय से एक अत्यंत आत्मीय संपर्क भाषा की भूमिका निभा रही है।

इसी ऐतिहासिक जुड़ाव और भाषाई सेतु को अब एक नया और आधुनिक स्वरूप प्रदान किया गया है। हाल ही में अन्नपूर्णा मीडिया नेटवर्क द्वारा बनाए गए ‘संपूर्ण’ (Sampurna) एप्लीकेशन में हिंदी भाषा को भी शामिल किया गया है। इसके माध्यम से हिंदी भाषी लोगों को इस मीडिया हाउस के साथ जोड़ने का महत्वपूर्ण काम किया गया है। नेपाल को अपना घर मानने वाले, वहां व्यापार या विद्यार्जन करने वाले लाखों लोगों के लिए यह एक अत्यंत सुलभ और सकारात्मक कदम है। यह इस बात का सशक्त प्रमाण है कि 1949 में जिस हिंदी को भारत के राजकाज और जन-संपर्क के लिए चुना गया था, वह आज पड़ोसी देशों में भी जन-सशक्तिकरण और जुड़ाव का प्रमुख माध्यम बन रही है।
‘संपूर्ण’ नामक यह मंच केवल समाचारों या सूचनाओं के प्रसारण तक सीमित नहीं है; इसमें समाहित ‘नागरिक स्वर’ जैसी अभिनव सुविधा एक आम व्यक्ति को यह अधिकार और शक्ति देती है कि वह अपने आस-पास के सामाजिक विषयों और विकास संबंधी बातों को अपनी सहज भाषा, यानी हिंदी में, चित्रों और चलचित्रों के साथ सामने रख सके। बाद में इन जन-सूचनाओं की प्रामाणिकता और सत्यता की जांच संवाददाताओं द्वारा की जाती है। इसके अतिरिक्त, इस संचार मंच में पंचांग, विक्रम संवत से ईस्वी की तिथियों का रूपांतरण, स्वर्ण-रजत के भाव, विदेशी मुद्रा विनिमय दरें और दैनिक जीवन की उपयोगी जानकारियां भी हिंदी में सहज रूप से उपलब्ध कराई गई हैं।

वास्तव में, हिंदी दिवस के पावन अवसर के परिप्रेक्ष्य में ‘संपूर्ण’ मंच का हिंदी संस्करण में आना महज एक तकनीकी विस्तार का सूचक नहीं है। यह इस बात का उल्लास है कि पचहत्तर वर्ष पूर्व राजभाषा के रूप में शुरू हुई हिंदी की यात्रा आज कितनी व्यापक और सर्वस्पर्शी हो चुकी है। अंततः, पूरी आशा की जा सकती है कि अन्नपूर्णा मीडिया नेटवर्क द्वारा नेपाल और भारत की साझा संस्कृति, परंपराओं तथा संबंधों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया यह ‘संपूर्ण’ मंच दोनों देशों की प्रगाढ़ मैत्री और हिंदी के निरंतर बढ़ते वैश्विक प्रभाव का एक कालजयी उदाहरण बनेगा।

Share this post:

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

खबरें और भी हैं...

वोट करें

[democracy id="1"]

Our Visitor

1 5 5 6 0 2
Total views : 415989

Follow us on