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जिला अस्पताल में सफाईकर्मी बन बैठे ‘वार्डबॉय’, CMS ने मांगे नियुक्त-पत्र

लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर: जिला अस्पताल में ठेके के सफाई कर्मचारियों की मनमानी और आए दिन होने वाली हड़ताल से निपटने के प्रयास में जुटे अस्पताल प्रशासन के हाथ एक बड़ा फर्जीवाड़ा लगा है। अस्पताल में नियमित सफाईकर्मियों की कमी का मुख्य कारण यह सामने आया है कि पूर्व में तैनात रहे एक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) की कलम से कई सफाईकर्मी अवैध रूप से ‘वार्डबॉय’ बनकर मलाई काट रहे हैं। इस गंभीर खेल का पर्दाफाश करने के लिए वर्तमान सीएमएस डॉ. संजय कुमार ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए अस्पताल में तैनात सभी 15 से 20 वार्डबॉय से उनके मूल नियुक्ति-पत्र और पदोन्नति से जुड़े दस्तावेज तलब कर लिए हैं। इस औचक पत्राचार से जिला अस्पताल के कर्मचारी वर्ग में हड़कंप मच गया है।
दरअसल, जिला अस्पताल की सफाई व्यवस्था वर्तमान में पूरी तरह ठेके के कर्मचारियों के भरोसे है, जो समय पर वेतन न मिलने के कारण अक्सर काम ठप कर देते हैं। जब सीएमएस डॉ. संजय कुमार ने इस अव्यवस्था को सुधारने के लिए सरकारी (नियमित) सफाईकर्मियों को जिम्मेदारी सौंपने की कवायद शुरू की, तो कागजों में उनकी संख्या बेहद कम मिली। अंदरूनी सूत्रों से पता चला कि पूर्व के एक अधिकारी ने नियमों को ताक पर रखकर चार सफाईकर्मियों को सीधे वार्डबॉय की ड्यूटी पर लगा दिया था, जो वर्तमान प्रशासन को भी गुमराह कर रहे थे।
नियमों के मुताबिक, सफाईकर्मी के पद से वार्डबॉय के पद पर पदोन्नति का अधिकार केवल एडिशनल डायरेक्टर हेल्थ (एडी) या उससे उच्च स्तर के अधिकारियों के पास सुरक्षित है। स्थानीय स्तर पर सीएमएस को ऐसा कोई कानूनी अधिकार नहीं है। सीएमएस डॉ. संजय कुमार ने स्पष्ट किया है कि सभी वार्डबॉय की मूल तैनाती की सत्यता जांची जा रही है। यदि कोई भी सफाईकर्मी अपने मूल कार्य को छोड़कर फर्जी तरीके से वार्डबॉय बना पाया गया, तो उसके खिलाफ तत्काल कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सीएमएस डा. संजय वर्मा की चेतावनी 

जिला अस्पताल के सीएमएस डा. संजय वर्मा का कहना है कि  सरकारी सेवाओं में बैकडोर एंट्री या अधिकारियों की साठगांठ से पद हथियाने वाले कर्मचारियों पर अब गाज गिरना तय है। जिला अस्पताल में वार्डबाय के रूप में 15 से 20 कर्मचारी है। सभी की नियुक्ति का स्पष्ट करने के लिए सभी से उनके नियुक्त पत्र व पदोन्नति पत्र मांगे गए हैं।

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