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मुजफ्फरनगर में किसानों की 16 मांगों को लेकर हुंकार: जीआईसी मैदान में ट्रैक्टरों के साथ किसानों का उमड़ा सैलाब

भारतीय किसान यूनियन ने मांगा गन्ने का भाव 500 रुपये, गन्ने काबकाया भुगतान और बिजली-सिंचाई का समाधान
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। यहां राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान पर पहली बार भाकियू की महापंचायत चल रही है, जो सुबह पांच बजे तक यानी शुक्रवार तक चलेगी। इस महापंचायत में किसानों ने अपनी प्रमुख समस्याओं में फसल का उचित, मूल्य, बिजली, खाद, गलत मुकदमे, आवारा पशुओं से नुकसान, बाढ़, कृषि ऋण आदि मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। इस पंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर 16 सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए ऐलान किया कि जब तक केंद्र व यूपी सरकार उनकी इन मांगों का समाधान नहीं करती, तब तक किसानों का आंदोलन चलता रहेगा।

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यहां महापंचायत में बोलते हुए राकेश टिकैत ने किसानों के लिए लाभकारी मूल्य और प्रभावी खरीद व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ सभी प्रमुख फसलों की सरकारी खरीद को मजबूत किया जाए और खरीद केंद्रों पर पारदर्शिता बरतने की मांग की। उन्होंने गन्ने के लाभकारी मूल्य को लेकर उन्होंने 500 रुपये प्रति क्विंटल की मांग की और चीनी मिलों पर बकाया भुगतान तत्काल करने, बिजली की समस्या के स्थायी समाधान के रूप में कृषि नलकूपों को पर्याप्त और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में वोल्टेज की समस्या, बार-बार ट्रिपिंग और अनियमित विद्युत आपूर्ति को दूर करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि बुवाई के समय किसानों को खाद के लिए घंटों कतार से बचाने की दिशा में डीएपी, यूरिया और अन्य आवश्यक कृषि आदानों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए कालाबाजारी व जमाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने पर भी बल दिया। वहीं उत्तराखंड के खानपुर के विधायक उमेश शर्मा ने कहा कि सरकारें किसान संगठनों को कमजोर करने का काम करती रही हैं। किसानों का सबसे अधिक शोषण सरकारें ही करती हैं। चीनी के दाम आसमान छू रहे हैं लेकिन सरकार गन्ने का भाव उसके अनुपात में नहीं दे रही।महापंचायत में विधायक ने कहा कि उत्तराखंड में भी किसानों का सर्वाधिक शोषण हो रहा है। हरिद्वार प्रदेश में सर्वाधिक राजस्व देने वाला जिला है लेकिन वहां के किसानों की सरकार को कोई चिंता नहीं है। उन्होंने किसानों की गिरती हालत पर ध्यान देने की बात कहते हुए उत्तराखंड में भाकियू के बड़े आंदोलन का आह्वान किया।

प्राकृतिक आपदा व आवारा पशुओं का मुद्दा
राकेश टिकैत ने इस मौके पर आवारा पशुओं से फसलों को हो रहे नुकसान पर चिंता व्यक्त करते हुए, ग्राम स्तर पर प्रभावी व्यवस्था बनाकर इस समस्या का स्थायी समाधान करने और गौशालाओं के संचालन की नियमित निगरानी की मांग की गई। वहीं प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, सूखा, आंधी आदि से हुए नुकसान का तत्काल मुआवजा देने की मांग की गई। फसल बीमा योजना को सरल और पारदर्शी बनाने तथा वास्तविक नुकसान के आधार पर बीमा राशि का भुगतान निर्धारित समय में सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उन्होंने नहरों की समय पर सफाई और टेल तक पानी पहुंचाने की मांग की गई। बंद पड़े सरकारी नलकूपों को तत्काल चालू कराने और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने पर बल दिया। कृषि ऋण से संबंधित समस्याओं को लेकर उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए ऋण पुनर्गठन और राहत की प्रभावी व्यवस्था की बात कही गई। किसानों के विरुद्ध कठोर वसूली की कार्रवाई से पहले उनकी वास्तविक आर्थिक स्थिति का संज्ञान लेने का आग्रह किया गया। इसी प्रकार मंडियों में किसानों के शोषण को रोकने के लिए पारदर्शी तौल, उचित मूल्य और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई। किसानों की उपज औने-पौने दामों पर खरीदने वाले बिचौलियों और अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई की बात कही गई।

किसानों के मुकदमे तत्काल वापस हो
राकेश टिकैत ने पंचायत में किसान आंदोलनों और किसानों से जुड़े मामलों में दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष समीक्षा और उचित मामलों में मुकदमे वापस लेने की कार्रवाई की मांग भी की। शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले किसानों का अनावश्यक उत्पीड़न न करने पर जोर दिया गया। कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत, जैसे डीजल, बिजली, खाद, बीज, कीटनाशक, कृषि मशीनरी आदि को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई, ताकि किसान की वास्तविक आय पर बढ़ते लागत भार को कम किया जा सके। प्रदेश सरकार द्वारा किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठक करने और किसानों से संबंधित नीतिगत निर्णयों से पहले उनसे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं और सुझावों को शामिल करने की मांग की गई।

पुरकाजी बने तहसील व सोनाली पर बांध का निर्माण
पुरकाजी क्षेत्र की बड़ी आबादी और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इसे पूर्ण तहसील बनाने पर जोर दिया गया।मुजफ्फरनगर के डूब क्षेत्र खादर में सोनाली नदी पर बांध बनाने और पुरकाजी को तहसील का दर्जा देने की मांग की गई, क्योंकि प्रत्येक वर्ष जल-भराव के कारण बाढ़ आती है, जिससे दर्जनों गांवों की हजारों हेक्टेयर भूमि डूब जाती है और किसानों को भारी नुकसान पहुंचता है। इसलिए बाढ़ से बचाव के लिए खादर क्षेत्र की सोनाली नदी पर बांध का निर्माण करने की मांग भी उठाई गई। खादर क्षेत्र में सोनाली नदी के उफान से दर्जनों गांवों की हजारों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि जलमग्न हो जाती है। भाकियू ने मांग की कि नदी पर मजबूत बांध बनाकर किसानों को स्थायी राहत दी जाए।

कृषि को निशुल्क बिजली: कृषि कार्य हेतु निशुल्क बिजली तथा सभी घरेलू एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं को 300 यूनिट निशुल्क बिजली उपलब्ध कराई जाए। बिजली बिल 2025, स्मार्ट मीटर व्यवस्था एवं बिजली निजीकरण की प्रक्रिया वापस ली जाए। किसानों एवं मजदूरों के हितों के विरुद्ध चारों श्रम संहिताएं, बीज विधेयक, राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति और राष्ट्रीय सहकारिता नीति वापस ली जाए। डीएपी, यूरिया एवं अन्य उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, सब्सिडी बहाल की जाए।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा हो: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की व्यापक समीक्षा कर सार्वजनिक क्षेत्र आधारित पारदर्शी फसल एवं पशुधन बीमा व्यवस्था लागू की जाए। वीबी जीराम जी के अंतर्गत 200 दिन का रोजगार तथा न्यूनतम 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित की जाए। बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि, भूस्खलन, ओलावृष्टि एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर प्रभावित किसानों, बंटाईदारों एवं कृषि मजदूरों को समुचित मुआवजा दिया जाए। भूमि अधिग्रहण, बेदखली एवं बुलडोजर कार्रवाई किसानों एवं ग्रामीण परिवारों के पुनर्वास के बिना न की जाए तथा भूमि अधिग्रहण कानून-2013 का सख्ती से पालन कराया जाए।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: सहित किसी भी ऐसे मुक्त व्यापार समझौते को स्वीकार न किया जाए जिससे भारतीय कृषि, डेयरी, एमएसपी व्यवस्था, सार्वजनिक खरीद एवं ग्रामीण रोजगार प्रभावित होते हों। डेयरी क्षेत्र में विदेशी दुग्ध उत्पादों के अनियंत्रित आयात पर रोक लगाकर देश के करोड़ों दुग्ध उत्पादक परिवारों के हितों की रक्षा की जाए।

उत्तराखंड के खानपुर के विधायक उमेश शर्मा ने कहा कि सरकारें किसान संगठनों को कमजोर करने का काम करती रही हैं। किसानों का सबसे अधिक शोषण सरकारें ही करती हैं। चीनी के दाम आसमान छू रहे हैं लेकिन सरकार गन्ने का भाव उसके अनुपात में नहीं दे रही।

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