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शुक्रतीर्थ में सोमवती अमावस्या पर गंदगी के साए में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, प्रशासन की स्वच्छता व्यवस्था ने कराई फजीहत

सुरक्षा व्यवस्था के मामले में पुलिस प्रशासन ने संभाले रखी अपनी जिम्मेदारी
दिल्ली-एनसीआर और दूरदराज से आए श्रद्धालुओं में नजर आया आक्रोश
लोकपथ लाइव, शुकतीर्थ (मुजफ्फरनगर): पौराणिक एवं ऐतिहासिक तीर्थ नगरी शुक्रताल (शुकतीर्थ) में सोमवार को सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर श्रद्धा और आस्था का जबरदस्त जनसैलाब उमड़ पड़ा। लेकिन जिला पंचायत और प्रशसन के स्वच्छता अभियान के सभी दावे खोखले नजर है, जिसके कारण दिल्ली, हरियाणा, नोएडा, शामली, बागपत और सहारनपुर सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों श्रद्धालुओं के सामने जिले की किरकीरी होती नजर आई। हालांकि श्रद्धालुओं ने इस अव्यवस्था के बीच पतित पावनी गंगा में डुबकी लगाई। दूसरी ओर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा, जिसकी बाहर से आए श्रद्धालुओं ने सहराहना भी की।

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एसपी ग्रामीण ने खुद संभाला मोर्चा, परखी सुरक्षा व्यवस्था
शुक्रताल में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अक्षय संजय महाडीक ने गंगा स्नान के मौके पर शुक्रताल का स्थलीय निरीक्षण और सुरक्षा के बंदोदस्तों का जायजा भी लिया। गंगा घाट, मुख्य मार्ग, मेला परिसर और पार्किंग स्थलों का बारीकी से निरीक्षण करते हुए उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिस बल को सतर्कता एवं संवेदनशीलता के साथ जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए।

घाटो पर गोताखोर भी हैं तैनात
एसपी ग्रामीण ने स्पष्ट कहा कि ड्यूटी में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए उन्होंने निर्देश दिए कि सभी प्रमुख घाटों पर कुशल गोताखोरों और नावों की तैनाती सुनिश्चित हो। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस बल मुस्तैद रहे। पूरे मेला क्षेत्र की सीसीटीवी कैमरों और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के जरिए कड़ी निगरानी रखी जाए। जाम की स्थिति से निपटने के लिए यातायात डायवर्जन प्लान सख्ती से लागू किया जाए। पुलिस प्रशासन ने जहां अपनी जिम्मेदारी बखूबी संभाली, लेकिन नागरिक सुविधाओं और स्वच्छता के मोर्चे पर जिला पंचायत और संबंधित विभाग स्वच्छता को लेकर किये जा रहे दावों के बावजूद पूरी तरह लापरवाह नजर आया। मुख्य गंगा घाट से लेकर मेला परिसर तक जगह-जगह कूड़े-कचरे के ढेर लगे रहे, जिससे उठती सड़ांध ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया।

गंगा की धारा में नजर आया जलकुंभी का अंबार
घाटों पर पसरी गंदगी के अलावा, सबसे बड़ी समस्या गंगा जी की मुख्य धारा में देखने को मिली। पानी के साथ भारी मात्रा में जलकुंभी बहकर घाटों के किनारे जमा हो गई थी। इसके कारण श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को स्नान करने में भारी कठिनाई हुई। जलकुंभी के जाल में पैर फंसने के डर से लोग गहरे पानी में जाने से कतराते नजर आए। इस कारण श्रद्धालुओं में आक्रोश भी साफतौर से झलकने को मिला है। जिले से बाहर से आए श्रद्धालुओं की पीड़ा इसी बात से लगाई जा सकती है, कि से आस्था के साथ इतनी दूर से गंगा स्नान के लिए शुकतीर्थ आते हैं। लेकिन यहां घाटों की स्थिति और अव्यवस्था देखकर मन दुखी हो गया। जबकि प्रशासन को पता था कि सोमवती अमावस्या पर लाखों लोग आएंगे, तो पहले से विशेष सफाई अभियान क्यों नहीं चलाया गया। घाटों पर पैर रखने ही चारों तरफ कचरा बिखरने से परेशानी आना स्वाभाविक है। इससे भी अलग स्थिति पानी की की स्थिति बदतर जब हुई, तब पानी में जलकुंभी का अंबार नजर आया है। प्रशासन की लापरवाही के कारण श्रद्धालुओं को इस पवित्र दिन पर दिक्कतों का सामना करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

जिला पंचायत व प्रशासन पर उठे सवाल
शुक्रताल में इस बड़े पर्व पर पुलिस की मुस्तैदी की तो सराहना हुई, लेकिन नगर पंचायत और स्थानीय प्रशासन की ढिलाई ने मेले के रंग को फीका कर दिया। धार्मिक और पर्यटन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले शुकतीर्थ में इस तरह की अव्यवस्था ने स्थानीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते घाटों की सफाई कराई जाती और जाल लगाकर जलकुंभी को रोका जाता, तो आज तीर्थयात्रियों को यह कड़वा अनुभव लेकर वापस नहीं जाना पड़ता। स्थानीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से इस मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

 

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