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मोदी सरकार में मंत्रियों का ‘रिपोर्ट कार्ड’ तैयार: कोयला, बिजली, स्वास्थ्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय रहे अव्व्ल

मंत्रालयों के कामकाज की सुस्ती और फाइलों में देरी पर पीएम मोदी सख्त
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सुशासन और प्रशासनिक कार्यकुशलता को बढ़ावा देने के लिए एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने पहली बार अपने सभी मंत्रालयों और विभागों के कामकाज का एक विस्तृत और वैज्ञानिक मूल्यांकन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस वर्ष की पहली मंत्रिपरिषद की मैराथन बैठक में कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने मंत्रियों के इस ‘रिपोर्ट कार्ड’ को पेश किया। लगभग साढ़े चार घंटे तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और राज्य मंत्री मौजूद रहे। इस दौरान प्रधानमंत्री ने दो टूक शब्दों में संदेश दिया कि प्रशासनिक सुस्ती और फाइलों के निपटारे में अनावश्यक देरी को अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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इन पैमानों पर परखा गया मंत्रालयों का दम
सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालयों का यह मूल्यांकन किसी राजनीतिक आधार पर नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से प्रशासनिक कार्यकुशलता के कड़े पैमानों पर किया गया है। इसके मुख्य मानकों में किस मंत्रालय में फाइलें कितने समय तक रुकी रहीं और उनका निस्तारण कितनी तेजी से हुआ। वहीं आम जनता की समस्याओं और शिकायतों को सुलझाने में किसने कितनी संवेदनशीलता और तेजी दिखाई। अंतर-मंत्रालयी विमर्श और कैबिनेट नोट्स पर समयबद्ध जवाब देने का रिकॉर्ड कैसा रहा। इसके अलावा संकट प्रबंधन के तौर पर देश और दुनिया के अप्रत्याशित संकटों के समय विभागों ने कितनी तत्परता से काम किया।

कोई ओवरऑल रैंकिंग नहीं, लेकिन ये मंत्रालय रहे ‘विजेता’
हालांकि सरकार ने मंत्रालयों के बीच किसी प्रकार के अनावश्यक विवाद से बचने के लिए कोई ‘ओवरऑल रैंकिंग’ या नंबर-1, नंबर-2 की सूची जारी नहीं की है, लेकिन अलग-अलग श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विभागों की पहचान की गई है।

मंत्रालय: किस क्षेत्र में रहा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
उपभोक्ता मामले मंत्रालयजन शिकायत निवारण और पश्चिम एशिया संकट के बेहतरीन प्रबंधन में शीर्ष पर रहा, जबकि कोयला मंत्रालय की फाइलों के त्वरित निस्तारण और प्रशासनिक प्रबंधन में सबसे अधिक अंक मिले। वहीं बिजली और स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रभावी कामकाज, नीतिगत सुधारों और समयबद्ध प्रतिक्रिया के लिए सराहे गए।

‘विकसित भारत 2047’ सरकार की प्रतिबद्धता
पीएम मोदीबैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों और शीर्ष नौकरशाहों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि सरकार का एकमात्र लक्ष्य आम लोगों की जिंदगी को आसान बनाना होना चाहिए। सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के और तेजी से पहुंचना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि शासन व्यवस्था में सुस्ती और फाइलों को अटकाकर रखने की प्रवृत्ति के लिए अब कोई स्थान नहीं है। मंत्रालयों को कम समय में अधिक और बेहतर परिणाम देने होंगे। ‘विकसित भारत 2047’ हमारे लिए केवल एक नारा नहीं है, बल्कि यह देश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है। इसके लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को और सरल बनाना होगा।

रिपोर्ट कार्ड के बाद मंत्रालयों में हड़कंप
कैबिनेट सचिव की इस प्रस्तुति के बाद सरकार के भीतर जवाबदेही तय करने का दौर शुरू हो गया है। कई वरिष्ठ मंत्रियों ने रिपोर्ट मिलते ही अपने-अपने विभागों के आला अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें शुरू कर दी हैं ताकि कमियों को तुरंत सुधारा जा सके।इसी कड़ी में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों के साथ आपात बैठक की और स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों और गरीब तबके के लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। उन्होंने जन शिकायतों के त्वरित समाधान को विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता घोषित किया है। माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से मंत्रालयों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और नीतिगत फैसले जमीन पर तेजी से उतरेंगे।

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