
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। कांवड़ यात्रा के चलते दिल्ली-देहरादून और दिल्ली-सहारनपुर मुख्य मार्ग पर बसों का संचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। हाईवे सील होने के कारण रोडवेज बसों को मुजफ्फरनगर, मेरठ, हरिद्वार और दिल्ली के लिए अन्य वैकल्पिक व लंबे रास्तों से घुमाकर चलाया जा रहा है। बसों के किलोमीटर में हुई इस भारी वृद्धि का सीधा असर अब आम यात्रियों की जेब पर पड़ने लगा है, क्योंकि रोडवेज विभाग ने बढ़े हुए किलोमीटर के हिसाब से किराए में भी बढ़ोतरी कर दी है।
मुजफ्फरनगर से हरिद्वार के लिए दो नए रूट, 280 तक पहुंचा किराया प्रशासन ने मुजफ्फरनगर से हरिद्वार जाने वाले यात्रियों के लिए दो अलग-अलग रूट निर्धारित किए हैं। यदि रोडवेज बस मुजफ्फरनगर से वाया बिजनौर होकर हरिद्वार जाएगी, तो उसे 183 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी, जिसके लिए यात्रियों को 280 रुपये किराया चुकाना होगा। वहीं, यदि बस वाया मोरना और लक्सर होते हुए हरिद्वार जाएगी, तो सफर 130 किलोमीटर का रहेगा और इसका किराया 202 रुपये निर्धारित किया गया है। बता दें कि सामान्य दिनों में हरिद्वार-मुजफ्फरनगर की दूरी मात्र 98 किलोमीटर है, जिसका नियमित किराया केवल 170 रुपये है।
खतौली मार्ग बंद, मवाना होकर 127 रुपये में पहुंचेंगे मेरठ: मुजफ्फरनगर से मेरठ जाने वाले यात्रियों को अब खतौली वाले सीधे मार्ग के बजाय वाया मवाना होकर जाना पड़ेगा। रोडवेज बसें अब जानसठ और मवाना होते हुए मेरठ पहुंचेंगी, जिससे यह सफर 88 किलोमीटर लंबा हो गया है और यात्रियों से प्रति सवारी 127 रुपये किराया वसूला जाएगा। इससे पहले खतौली रूट से मेरठ जाने वाली बसों को केवल 57 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी, जिसका किराया 90 रुपये था। इस रूट डायवर्जन के कारण मेरठ के किराए में 37 रुपये की एकमुश्त वृद्धि हुई है।
दिल्ली जाने के लिए तय करना होगा 209 किलोमीटर का सफर: कांवड़ यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा मार दिल्ली जाने वाले यात्रियों पर पड़ी है। मुजफ्फरनगर से दिल्ली के लिए बसों को अब वाया मवाना होकर मेरठ भेजा जा रहा है, जहाँ से बसें हापुड़ होते हुए दिल्ली पहुंचेंगी। इस लंबे चक्कर के कारण यह सफर 132 किलोमीटर के सामान्य मार्ग से बढ़कर 209 किलोमीटर का हो गया है। किलोमीटर बढ़ने के कारण दिल्ली का किराया भी 217 रुपये से बढ़कर सीधे 319 रुपये कर दिया गया है। अचानक हुई इस किराया वृद्धि से दैनिक यात्रियों और आम जनता में भारी असंतोष है, लेकिन रास्ते बंद होने के कारण उनके पास कोई अन्य विकल्प भी मौजूद नहीं है।
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