
क्षमता से अधिक सवारियां और तेज रफ्तार बनी काल, पीएम मोदी ने जताया दुख, मुआवजे का ऐलान
लोकपथ लाइव, उधमपुर: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में सोमवार की सुबह एक ऐसी त्रासदी आई जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। रामनगर से उधमपुर की ओर जा रही एक यात्री बस कघोट गांव के समीप एक खतरनाक मोड़ पर अनियंत्रित होकर करीब 80 फीट गहरी खाई में जा गिरी। इस भीषण हादसे में अब तक 21 यात्रियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 25 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। घटनास्थल पर बिखरा सामान, खून से सनी सड़कें और अपनों को तलाशते परिजनों की चीखें हादसे की भयावहता बयां कर रही थीं। गंभीर रूप से घायल यात्रियों की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें एयरलिफ्ट कर जम्मू भेजने की व्यवस्था की गई है।


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा सुबह करीब 10:00 बजे हुआ। बस एक दूरदराज के गांव से सवारियां लेकर उधमपुर शहर की ओर बढ़ रही थी। जैसे ही वाहन कागोर्ट गांव के पास एक ‘ब्लाइंड कर्व’ (अंधा मोड़) पर पहुँचा, चालक ने नियंत्रण खो दिया। क्षण भर में बस सड़क से उतरी और पलटती हुई गहरी खाई में जा गिरी। बस की रफ्तार काफी अधिक थी और जैसे ही कघोट के पास तीखा मोड़ आया, चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। बस रेलिंग तोड़ते हुए सीधे खाई में जा गिरी। झटके इतने तेज थे कि कई यात्री खिड़कियों से उछलकर सीधे पत्थरों पर जा गिरे, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। क्षमता से ज्यादा बोझ और जानलेवा रफ्तार प्रारंभिक जांच और घायलों के बयानों से यह स्पष्ट हुआ है कि बस में क्षमता से कहीं अधिक यात्री सवार थे। कई यात्री बस के भीतर खड़े होकर सफर कर रहे थे।

देवदूत बनकर आए ग्रामीण, पुलिस ने संभाला मोर्चा
धमाके की आवाज सुनते ही आसपास के ग्रामीण ढलान की ओर दौड़ पड़े। प्रशासन के पहुँचने से पहले स्थानीय लोगों ने मलबे में दबे घायलों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। बाद में उधमपुर पुलिस और आपातकालीन सेवाओं (SDRF) ने मौके पर पहुँचकर रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज किया। पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अब तक 18शव बरामद किए जा चुके हैं। चट्टानों के बीच जिंदगी बचाने की जंग हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों ने अदम्य साहस का परिचय दिया और खाई में उतरकर घायलों को पीठ पर लादकर ऊपर लाना शुरू किया। सभी घायलों को तुरंत एंबुलेंस के जरिए जीएमसी (GMC) उधमपुर पहुंचाया गया।
पीएम मोदी ने किया मुआवजे का एलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा सहायता राशि की घोषणा की गई है। मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 रुपये की मदद दी जाएगी। उधर, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि इलाज में किसी भी तरह की कोताही न बरती जाए।
उच्चस्तरीय प्रतिक्रिया और सहायता
हादसे पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उधमपुर के जिला उपायुक्त (DC) से रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने आश्वासन दिया कि घायलों को बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट कर जम्मू के सैन्य अस्पताल या मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे और घायलों के मुफ्त इलाज के निर्देश दिए हैं। महबूबा मुफ्ती ने इस घटना को पहाड़ी क्षेत्रों की लचर सड़क सुरक्षा का परिणाम बताया।
जांच के घेरे में ‘रफ्तार’ और ‘रास्ता’
प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह तेज रफ्तार और मोड़ पर चालक की चूक मानी जा रही है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति और सुरक्षा घेरों (Parapets) का न होना भी ऐसी घटनाओं को न्यौता देता है। जिला प्रशासन ने मामले की न्यायिक जांच के संकेत दिए हैं। उधमपुर की इस दुखद घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक सुरक्षित सफर के अभाव में मासूम लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे?











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