
लोकपथ लाइव, लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में तैनात शिक्षकों ने टीईटी (TET) अनिवार्यता के नए नियमों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी मांगों को लेकर प्रदेश भर के शिक्षक इन दिनों चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन की गूंज पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर राजधानी तक सुनाई दे रही है।
ट्विटर से लेकर जमीन तक संघर्ष
आंदोलन की शुरुआत 22 फरवरी को एक विशाल ट्विटर (X) अभियान से हुई, जिसमें लाखों शिक्षकों ने अपनी आवाज बुलंद की। इसके बाद 23 से 25 फरवरी तक शिक्षक स्कूलों में शिक्षण कार्य के दौरान काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि वे काम प्रभावित किए बिना अपना लोकतांत्रिक विरोध जता रहे हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी समर्थन
इस अभियान को जनपदों में जबरदस्त समर्थन मिल रहा है:
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मुजफ्फरनगर: यहाँ 5,000 से अधिक शिक्षक इस मुहिम से जुड़ चुके हैं।
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गाजियाबाद: जिले के 7,000 से ज्यादा शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध का समर्थन किया है।
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अन्य जनपदों से भी बड़ी संख्या में शिक्षक इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं, जिससे विभाग में खलबली मची है।

26 फरवरी को जिला मुख्यालयों पर घेराव
उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ सहित अन्य शिक्षक संगठनों ने ऐलान किया है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो 26 फरवरी को प्रदेश के सभी जिलों में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालयों पर विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। शिक्षकों का तर्क है कि पुराने शिक्षकों पर नए सिरे से टीईटी थोपना उनके करियर और अनुभव के साथ अन्याय है।
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