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चीनी सीमा के पास दिखी भारत की हवाई ताकत, वायुसेना का पराक्रम

असम में प्रधानमंत्री मोदी ने किया हाईवे एयरस्ट्रिप का उद्घाटन
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को असम में मोरान बाईपास पर बनी 4.2 किमी लंबी हाईवे एयरस्ट्रिप का उद्घाटन किया। जहां चीन सीमा के पास इसके बाद पीएम मोदी ने भारतीय वायुसेना के विमानों और हेलीकॉप्टरों, जिसमें शामिल सुखोई-30, राफेल और एएन-32 समेत 16 विमानों ने टेकऑफ और लैंडिंग का पराक्रम दिखाते हुए शानदार प्रदर्शन किया।पीएम मोदी खुद भी लॉकहीड सी-130 हरक्यूलस विमान से इसी हाइवे पर उतरे।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में डिब्रूगढ़ दौरे के तहत नई दिल्ली से चाबुआ एयरफोर्स बेस पहुंचे और वहीं से हाईवे एयरस्ट्रिप पर डिब्रूगढ़ में मोरान बाईपास पर बनी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ईएलएफ) पर भारतीय वायुसेना के जांबाज लड़ाकू विमानों के अद्भुत हवाई प्रदर्शन का जायजा लिया। यह एयरस्ट्रिप आपात स्थितियों में फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट और हेलीकॉप्टर के लिए वैकल्पिक रनवे का काम करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोरान बाईपास पर बनी 4.2 किलोमीटर लंबी हाईवे एयरस्ट्रिप का उद्घाटन किया। चीनी सीमा से मात्र 300 किलोमीटर दूर यह हाईवे एयरस्ट्रिप पर इस हवाई प्रदर्शन में भारतीय वायुसेना के पायलटों ने ईएलएफ पर सटीक टेकऑफ और लैंडिंग का प्रदर्शन किया। इस पराक्रम में सबसे पहले सुखोई-30 एमकेआई ने उड़ान भरी, इसके बाद राफेल विमान ने टेकऑफ किया। वायुसेना का ‘वर्कहॉर्स’ एएन-32 ने ‘टच एंड गो’ का प्रदर्शन किया। इस दौरान सुखोई और राफेल के तीन-तीन विमानों ने मोरान के आकाश में तेजी से उड़ान भरी। एक-एक सुखोई और राफेल ईएलएफ पर लैंड हुए, जबकि अन्य विमानों ने ओवरशूट प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम में स्वदेशी एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) ने विशेष हेली-बोर्न ऑपरेशन (एसएचबीओ) का प्रदर्शन किया, जिसमें कमांडो को एयरस्ट्रिप पर उतारा गया। यह हाईवे एयरस्ट्रिप रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और प्राकृतिक आपदा, युद्ध या अन्य आपात स्थितियों में राहत और बचाव कार्यों में भी अहम भूमिका निभाएगी।

पूर्वोत्तर की पहली हवाई पट्टी
असम में राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनी 4.2 किलोमीटर लंबी यह हवाई पट्टी पूर्वोत्तर की पहली ऐसी सुविधा है, जहां से आपात स्थितियों में वायुसेना के लड़ाकू व परिवहन विमानों का संचालन किया जा सकेगा। मोरान बाईपास पर तैयार की गई यह सुविधा दूरदराज के क्षेत्रों में मानवीय सहायता व आपदा राहत अभियानों के दौरान भी अहम साबित होगी। यह पट्टी राफेल और सुखोई जैसे 40 टन वजनी लड़ाकू विमानों और 74 टन तक भारी मालवाहक विमानों का वजन सह सकती है। मोरान बाईपास पर स्थिति यह हवाई पट्टी रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चीन सीमा के बहुत करीब हैं। यहां चाबुआ और तेजपुर जैसे मुख्य एयरबेस है, जहां तकनीकी समस्या होने पर इन पट्टियों से भी दुश्मन को जवाब दिया जा सकता

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