
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर: बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले कुछ परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई और अनुशासन के बजाय सोशल मीडिया रील का क्रेज चर्चा में है। विद्यालय परिसर में फिल्मी और रोमांटिक गानों पर बनाई जा रही रीलों में शिक्षिकाएं अभिनय और डांस करती नजर आ रही हैं। कुछ वीडियो में बच्चों को भी रील का हिस्सा बनाया गया है। सरकारी विद्यालयों के परिसर में इस तरह की गतिविधियों ने विद्यालय की शैक्षणिक गरिमा और अनुशासन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि जिन विद्यालयों की रील सोशल मीडिया पर दिखाई दे रही हैं, वहां छात्र संख्या बेहद कम है। कोलाहेड़ी के विद्यालय में जहां महज 15 बच्चों का नामांकन बताया गया है, वहीं टबीटा के विद्यालय में यह संख्या 28 है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर कितना ध्यान दिया जा रहा है।
कोलाहेड़ी : 15 बच्चों के विद्यालय में रीलों का सिलसिला
पुरकाजी ब्लॉक के गांव कोलाहेड़ी स्थित प्राथमिक विद्यालय में तैनात प्रधानाध्यापिका रितिका भारद्वाज के सोशल मीडिया अकाउंट पर विद्यालय परिसर से जुड़ी कई रीलें दिखाई देती हैं। इनमें सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ फिल्मी गानों पर बनाई गई वीडियो भी शामिल हैं। कुछ वीडियो में विद्यालय परिसर में बाइक से स्टंट जैसी गतिविधियां दिखाई देती हैं। फिल्मी और रोमांटिक संगीत के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, विद्यालय में महज 15 बच्चों का नामांकन बताया गया है। इसके सापेक्ष शिक्षकों की तैनाती को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यूपीएस सिंभालकी के प्रधानाध्यापक विपिन कुमार ने बताया कि उनके यहां अटैच कोलाहेड़ी विद्यालय में 15 बच्चे हैं।
वीडियो देखें 🔗
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टबीटा की मैडम का बच्चों के साथ फिल्मी अंदाज
खतौली ब्लॉक के टबीटा स्थित परिषदीय विद्यालय में भी नामांकन की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। यहां प्रधानाध्यापिका दीपा रावत के सोशल मीडिया अकाउंट पर विद्यालय परिसर में बनाई गई कई वीडियो मौजूद होने की बात सामने आई है। इनमें बच्चों के साथ फिल्मी गीतों पर डांस और फिल्मी कलाकारों की नकल करते हुए वीडियो बनाए जाने के मामले भी शामिल हैं। सवाल यह है कि जब विद्यालयों में बच्चों की संख्या कम है, तब शिक्षकों की प्राथमिकता नामांकन बढ़ाने, पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर करने की होनी चाहिए या सोशल मीडिया के लिए कंटेंट तैयार करने की।खतौली के बीईओ पंकज अग्रवाल ने बताया कि टबीटा विद्यालय में नामांकन 28 बच्चों का है।
अधिकारियों की निगरानी पर भी सवाल
परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों को बच्चों को अनुशासन, संस्कार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में विद्यालय परिसर को सोशल मीडिया रील का मंच बनाए जाने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर कम नामांकन वाले विद्यालयों में इस तरह की गतिविधियों पर विभागीय स्तर से निगरानी और कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही है।
बीएसए ने कहा—रील बनाना गलत, लिया जाएगा संज्ञान
“BSA संदीप कुमार ने कहा की शिक्षिकाओं की नियुक्ति विद्यालय में बच्चों को अनुशासन में रहते हुए पढ़ाने व एक्टिविटी कराने की है। यदि विद्यालय परिसर में शिक्षिकाएं फिल्मी गानों पर रील बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रही हैं तो गलत है। इसका संज्ञान लिया जाएगा। शिक्षिकाओं पर कारवाई होगी।”
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