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पीएम मोदी की डिग्री विवाद: गुजरात हाई कोर्ट से केजरीवाल को झटका

अदालत के एक फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

अब केजरीवाल और संजय सिंह पर लटकी मानहानि केस की तलवार
LP Live, New Delhi: गुजरात हाई कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट के मार्च के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें अदालत ने फैसला दिया था कि गुजरात विश्वविद्यालय प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री की जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं है।

दरअसल गुजरात हाईकोर्ट ने पीएम मोदी की डिग्री के विवाद में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की समीक्षा याचिका खारिज कर दिया है और जस्टिस बीरेन वैष्णव ने अपने पूर्व के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत के मुताबिक कि गुजरात विश्वविद्यालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं है। जबकि समीक्षा याचिका में केजरीवाल ने कहा था कि गुजरात विश्वविद्यालय के दावे के मुताबिक पीएम मोदी की डिग्री वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है, जबकि कोर्ट में सुनवाई के दौरान ऐसा दावा किया गया था। इसके अलावा केजरीवाल ने कोर्ट द्वारा लगाए गए 25 हजार के जुर्माने को भी गलत करार दिया था। हाई कोर्ट द्वारा केजरीवाल की याचिका खारिज करने का मतलब अब केजरीवाल को जहां 25 हजार रुपये जुर्माना भरना होगा, वहीं गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा केजरीवाल व संजय सिंह के खिलाफ दायर मानहानि का आपराधिक मुकदमा आगे बढ़ने की राह भी प्रशस्त हो गई है।

क्या है मामला
केंद्रीय सूचना आयोग ने अप्रैल 2016 में अरविंद केजरीवाल से उनके चुनावी फोटो पहचान पत्र के बारे में जानकारी मांगी, तो केजरीवाल ने पीएम मोदी की शैक्षणिक डिग्री का खुलासा करने की ही मांग कर डाली। इस पर केंद्रीय सूचना आयोग ने गुजरात विश्वविद्यालय को पीएम मोदी की डिग्री का ब्यौरा देने का निर्देश दिया। आयोग के इस निर्देश के खिलाफ गुजरात विश्वविद्यालय ने गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिस पर हाईकोर्ट ने सूचना आयोग के आदेश को रद्द कर दिया और केजरीवाल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया। इसके बाद अरविंद केजरीवाल और आप नेता संजय सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, तो गुजरात विश्वविद्यालय ने आरोप लगाया कि आप के इन दोनों नेताओं ने यूनिवर्सिटी के खिलाफ अपमानजनक बयान दिए और विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाया। विश्वविद्यालय ने केजरीवाल व संजय सिंह के खिलाफ मानहानि का मुकदमा कर दिया। वहीं अरविंद केजरीवाल ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पुर्नविचार याचिका दायर की थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।

क्या है गुजरात विश्वविद्यालय का तर्क
इस मामले में गुजरात विश्वविद्यालय ने तर्क दिया था कि आरटीआई अधिनियम का दुरुपयोग हिसाब बराबर करने और विरोधियों पर बचकानी चुटकी लेने के लिए किया जा रहा है। विश्वविद्यालय ने अदालत को यह भी बताया था कि सीआईसी का आदेश प्रधानमंत्री की निजता को भी प्रभावित करता है। वहीं भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि गैर-जिम्मेदाराना बचकानी जिज्ञासा को सार्वजनिक हित नहीं कहा जा सकता है। मेहता ने तर्क दिया कि विश्वविद्यालय ने पहले ही प्रमाण-पत्र सार्वजनिक डोमेन में डाल दिया है और आरटीआई के तहत किसी तीसरे व्यक्ति को प्रधानमंत्री की विश्वविद्यालय डिग्री की प्रति देने की कोई बाध्यता नहीं है।

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