
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। जिले में बीते तीन दिनों से लगातार हो रही झमाझम बारिश के बीच सोमवार को मौसम का एक बेहद खूबसूरत और दुर्लभ नज़ारा देखने को मिला। बारिश थमने के बाद जैसे ही धूप की किरणें कुछ देर के लिए खिलीं तो मुजफ्फरनगर के आसमान में एक विशाल और स्पष्ट सतरंगी इंद्रधनुष उभर आया। नीले और बादलों से घिरे आसमान पर धनुष के आकार में फैले इन सात रंगों ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
मुजफ्फरनगर सालासर बालाजी धाम के कोषाध्यक्ष राजीव बंसल ने बताया कि उनकी बिटियां अपेक्षा बंसल ने इस इंद्रधनुष के दृष्य को अपनी मोबाइल के कैमरें से कैद किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों बाद शहर के आसमान में इतना खूबसूरत और स्पष्ट इंद्रधनुष देखकर स्थानीय नागरिक रोमांचित हो उठे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने छतों और सड़कों पर आकर इस अद्भुत प्राकृतिक दृश्य का आनंद लिया। कई लोगों ने इस पल को यादगार बनाने के लिए अपने मोबाइल कैमरों में इंद्रधनुष की तस्वीरें व वीडियो कैद किए, जो दिनभर सोशल मीडिया पर भी छाए रहे। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने काफी लंबे समय के बाद इतने स्पष्ट और पूर्ण रूप में इंद्रधनुष को आसमान में बनते हुए देखा है।
विशेष: क्यों और कैसे बनता है इंद्रधनुष?
1. बनने का वैज्ञानिक कारण: इंद्रधनुष वातावरण में मौजूद जल की सूक्ष्म बूंदों द्वारा सूर्य के प्रकाश के परावर्तन , अपवर्तन और विक्षेपण के कारण बनता है। जब सूर्य की रोशनी हवा में तैरती पानी की बूंदों में प्रवेश करती है, तो बूंदें एक छोटे ‘प्रिज्म’ की तरह कार्य करती हैं। प्रकाश की किरणें बूंद के अंदर जाकर अपने सात मूल रंगों में विभाजित हो जाती हैं और जब ये बूंद से बाहर निकलती हैं, तो आसमान में एक रंगीन धनुष का आकार दिखाई देता है।
2. इंद्रधनुष की मुख्य विशेषताएं:
सात रंगों का क्रम: इंद्रधनुष में रंगों का एक निश्चित क्रम होता है, जिसे अंग्रेजी में VIBGYOR (बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल) कहा जाता है। इसमें लाल रंग सबसे बाहरी (ऊपरी) सिरे पर और बैंगनी रंग सबसे भीतरी सिरे पर होता है।
सूर्य की दिशा के विपरीत: इंद्रधनुष हमेशा सूर्य की दिशा के ठीक विपरीत दिशा में दिखाई देता है। यानी यदि सूर्य पश्चिम दिशा में ढल रहा हो, तो इंद्रधनुष पूर्व दिशा में बनेगा।
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