
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले जनपद में संगठन को मजबूत करने और उसमें नई ऊर्जा फूंकने के उद्देश्य से कांग्रेस ने कवायद तेज कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय व प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर पहुंचे पर्यवेक्षकों की टीम आठ दिनों तक जिले का दौरा कर और कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलकर वापस मुख्यालय लौट गई है। इस दौरान पर्यवेक्षकों ने जिलाध्यक्ष और नगर अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों के आवेदन एकत्र किए हैं, जिसके बाद नए जिलाध्यक्ष की रेस में 12 प्रमुख नाम सामने आए हैं। इसमें मुस्लिम पदाधिकारियों के नाम बड़ी संख्या में सामने आए हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पिछले सप्ताह जिले में पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय पर्यवेक्षक गणेश यादव, राष्ट्रीय सचिव अविनाश काजला और प्रदेश पर्यवेक्षक सबी खान ने सभी तहसीलों का भ्रमण किया। इस प्रवास के दौरान टीम ने 100 से अधिक स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ व्यक्तिगत रूप से वार्ता की। फीडबैक के दौरान वर्तमान जिलाध्यक्ष सतपाल कटारिया के कामकाज को लेकर कार्यकर्ताओं में काफी नाराजगी देखने को मिली, जिसके बाद जिलाध्यक्ष बदलने पर गंभीरता से मंथन शुरू हुआ।
संगठन के पुनर्गठन के लिए 12 प्रमुख नेताओं ने जिलाध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की है। इनमें पूर्व प्रभारी जिलाध्यक्ष राकेश पुंडीर, हरेंद्र त्यागी, वर्तमान जिलाध्यक्ष सतपाल कटारिया, सलमान सईद, गुफरान काजमी, अब्दुल्ला आरिफ, बिलकिस चौधरी, महफूज राणा, आकिल राणा और मुनीर शामिल हैं। वहीं नगर अध्यक्ष पद के लिए भी खींचतान जारी है, जिसके लिए गीता काकरान, धीरज माहेश्वरी और प्रदीप जैन ने अपने आवेदन पर्यवेक्षकों को सौंपे हैं।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी जिले में सामाजिक संतुलन और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसला लेने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि पार्टी एक पद अनुसूचित जाति (SC) और दूसरा पद मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि को सौंपने की रणनीति पर काम कर रही है। पर्यवेक्षक सभी 12 नामों का पैनल और जमीनी रिपोर्ट लेकर शीर्ष नेतृत्व के पास पहुंच चुके हैं, जहाँ जल्द ही नए जिलाध्यक्ष के नाम का औपचारिक ऐलान होने की संभावना है।
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