
900 मीटर की दूरी तय कर रचा कीर्तिमान, नेशनल तैराक बनने का है सपना, रोज 3 घंटे करती है कड़ी मेहनत
लोकपथ लाइव, प्रयागराज: संगम नगरी प्रयागराज की धरती से अक्सर अद्भुत प्रतिभाएं निकलती हैं, लेकिन इस बार महज 4 साल की एक बच्ची ने वह कर दिखाया है जिसे सुनकर हर कोई दंग है। सत्या नाम की इस नन्ही खिलाड़ी ने अपनी उम्र से कई गुना बड़े हौसले का परिचय देते हुए 900 मीटर चौड़ी यमुना नदी को सिर्फ 21 मिनट 28 सेकंड में तैरकर पार कर लिया। लहरों के बीच सत्या की इस फुर्ती को देखकर घाट पर मौजूद लोग उसे ‘नन्ही जलपरी’ कह रहे हैं।


आमतौर पर जिस उम्र में बच्चे पानी से डरते हैं या टब में नहाने से कतराते हैं, सत्या उस उम्र में नदी की लहरों से खेल रही है। अपनी इस उपलब्धि पर मासूमियत से सत्या कहती है, “मुझे पानी से बिल्कुल भी डर नहीं लगता। तैरना मुझे बहुत पसंद है और मैं इसे एन्जॉय करती हूँ।”

अनुशासन और कड़ी मेहनत का संगम
सत्या की यह कामयाबी रातों-रात नहीं मिली है। इसके पीछे उसका कड़ा अनुशासन और अभ्यास है। सत्या रोजाना 2 से 3 घंटे तक यमुना नदी के गहरे पानी में तैराकी का अभ्यास करती है। खेल के साथ-साथ वह अपनी पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान देती है। सत्या के पिता और मां शिवानी उसे एक विश्वस्तरीय तैराक बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
मां का सपना: बेटी बने देश की शान
सत्या की मां शिवानी की आंखों में अपनी बेटी के लिए बड़े सपने हैं। वे बताती हैं कि सत्या की पानी के प्रति दिलचस्पी को देखते हुए उन्होंने उसे तैराकी के लिए प्रेरित किया। शिवानी का कहना है, “हमारा सपना है कि सत्या एक दिन नेशनल लेवल की तैराक बने और देश के लिए मेडल लेकर आए। हम उसके अभ्यास और खान-पान का पूरा ध्यान रखते हैं।”
प्रयागराज में चर्चा का विषय
900 मीटर की दूरी इतने कम समय में पार करना किसी पेशेवर तैराक के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में एक 4 साल की बच्ची द्वारा यह कारनामा करना पूरे प्रयागराज में चर्चा का विषय बना हुआ है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सत्या को सही कोचिंग और सुविधाएं मिलीं, तो वह भविष्य मं् ओलिंपिक जैसे बड़े मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकती है।












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