
लोकसभा में पेश हुआ एफसीआरए विधेयक जेपीसी को भेजा, कोयला और खान विधेयक भी कराया पास
संसद के दोनों सदनों में पेश हुई जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे आरोपों की जांच रिपोर्ट
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में बुधवार को विपक्ष के हंगामे के बीच पिछले दो दिनों की तर्ज पर सरकार ने शोर शराबे के बीच ही कार्यसूची में शामिल विधायी कार्यो को निपटा लिया है। सबसे महत्वपूर्ण ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी एफसीआरए लोकसभा में पेश करने के बाद संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी को भेज दिया है। इसके अलावा लोकसभा में हंगामे के दौरान ही खनिज एवं खनन संशोधन विधेयक पर भी मुहर लग गई है, जिसे गुरुवार को सत्र के अंतिम दिन राज्यसभा से भी मंजूरी मिलने की उम्मीद है। वहीं दूसरी ओर राज्यसभा में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक और केरला(नाम बदलना) विधेयक को भी मंजूरी मिल गई है। इसके अलावा संसद में सबसे महत्वूर्ण मामला जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे आरोपों के बाद गठित हुई थी तीन सदस्यीय समिति की संसद में पेश की गई रिपोर्ट चर्चा का विषय रही, जिसमें महाभियोग चलाने की प्रक्रिया की सिफारिश भी शामिल है।


जेपीसी के हवाले हुआ एफसीआरए विधेयक
लोकसभा में दो बजे की कार्यवाही के दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक पेश किया। केंद्र सरकार ने एफसीआरए विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने का प्रस्ताव भी पेश कर दिया। सरकार ने सरकार ने ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ को विस्तृत समीक्षा और विचार-विमर्श के लिए संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने का प्रस्ताव रखा है। जेपीसी में 31 सदस्य होंगे, जिनमें लोकसभा से 21 व राज्यसभा से 10 सांसद शामिल किये जाएंगे। जेपीसी को इस विधेयक का अध्ययन करने के बाद आगामी शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करनी होगी। सरकार ने ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ को विस्तृत समीक्षा और विचार-विमर्श के लिए संसद की संयुक्त के पास भेजने का प्रस्ताव रखा है।

लोकसभा में बिना चर्चा के खनिज एवं खनन संशोधन विधेयक
इससे पहले लोकसभा ने खनिज और खनन (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को बिना चर्चा के पारित कर दिया। विधेयक पेश किए जाने के कुछ ही देर बाद विपक्षी सांसद भारी नारेबाजी और विरोध करते हुए सदन के बीचोंबीच आ गए। इसके बाद पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बिना चर्चा के ही विधेयक को पारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। उन्होंने विधायी कामकाज में हिस्सा नहीं लेने को लेकर विपक्षी सांसदों को फटकार भी लगाई।
राज्यसभा में एनसीडीसी कानून पास होते ही विधेयक को संसद की मिली मंजूरी
संसद ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 (एनसीडीसी एक्ट) में संशोधन से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस बदलाव का उद्देश्य देश के सहकारी क्षेत्र को मजबूत करना और उसके विकास को बढ़ावा देना है। नए प्रावधानों के जरिए सहकारी संस्थाओं के विकास और उनकी भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।
संसद ने दी ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक को मंजूरी
राज्यसभा में लोकसभा से पारित हुए ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक 2026 को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने पारित कराने के लिए पेश किया। इस विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में सरकार ने बताय कि राज्य का आधिकारिक नाम अंग्रेजी व हिंदी दोनों में बदलकर ‘केरलम’ (Keralam) कर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जून 2024 में केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब संसद में पेश किया गया है। राज्यसभा में इस विधेयक को भी मंजूरी मिल गई है।
संसद में पेश हुई जस्टिस यशवंत वर्मा पर जांच समिति की रिपोर्ट पेश
संसद के मानसून सत्र के 18वें दिन आज न्यायिक जवाबदेही से जुड़ा एक बेहद अहम मामला सदन के पटल पर रखा गया। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की जांच करने वाली तीन सदस्यीय समिति की विस्तृत रिपोर्ट आज लोकसभा और राज्यसभा यानी दोनों सदनों में औपचारिक रूप से पेश कर दी गई है। संसद सचिव जनरल द्वारा पेश की गई इस रिपोर्ट में दो खंड शामिल हैं, जिन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रस्तुत किया गया है। इसके साथ ही जांच प्रक्रिया के दौरान दर्ज किए गए सभी मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों को भी सदन के पटल पर रख दिया गया है। इस मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से कथित तौर पर भारी मात्रा में बेहिसाब नकदी बरामद होने की बात सामने आई थी। इसके बाद उन्हें पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया तेज कर दी गई थी। संसद के 146 सांसदों ने एकजुट होकर जस्टिस वर्मा को पद से हटाने (महाभियोग) की मांग को लेकर नोटिस दिया था। सांसदों के इस प्रस्ताव और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 15 अगस्त 2025 को न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के प्रावधानों के तहत तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। समिति को आरोपों की गहनता से निष्पक्ष जांच करने का जिम्मा सौंपा गया था। समिति द्वारा प्रस्तुत की गई इस विस्तृत रिपोर्ट के बाद अब संसद में आगामी संवैधानिक और विधायी कदमों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।











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