
राज्यसभा की उत्पादकता 110 और लोकसभा की उत्पादकता 93 फीसदी रही
वामपंथी उग्रवाद से लेकर पश्चिम एशिया संकट तक पर हुई गहन चर्चा
ओ.पी. पाल (लोकपथ लाइव), नई दिल्ली: संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभाका बजट सत्र 2026 शनिवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। 18वीं लोकसभा का सातवां सत्र और राज्यसभा का 270वां सत्र राष्ट्र के विकास की नई प्राथमिकताओं और विधायी सक्रियता का गवाह बना। जहाँ राज्यसभा ने 109.87 फीसदी की शानदार उत्पादकता दर्ज की, वहीं लोकसभा में भी 93 फीसदी कार्य संपन्न हुआ। दोनों सदनों में भारत की भाषाई शक्ति का प्रदर्शन हुआ। लोकसभा में 18 भारतीय भाषाओं में 181 बयान दिए गए, जबकि राज्यसभा में 12 क्षेत्रीय भाषाओं में 94 बार सदस्यों ने अपनी बात रखी। दोनों ही सदनों में ‘सिमल्टेनियस इंटरप्रिटेशन’ (एक साथ अनुवाद) की सुविधा ने इस संवाद को सुगम बनाया।


लोकसभा में 31 बैठकें हुईं
विधायी कार्यों और चर्चाओं का केंद्रलोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सूचित किया कि 28 जनवरी से शुरू हुए इस सत्र के दौरान 31 बैठकें हुईं, जो लगभग 151 घंटे 42 मिनट तक चलीं। बजट के दौरान वित्त मंत्री द्वारा 1 फरवरी को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 पर 13 घंटे चर्चा हुई, जिसमें 63 सदस्यों ने भाग लिया। 18 मार्च को विनियोग विधेयक और 25 मार्च को वित्त विधेयक पारित किया गया।

पारित किए गए ये महत्वपूर्ण विधेयक
1.औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026
2.ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026
3.वित्त विधेयक, 2026
4.दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026
5.आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026
6.जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026
7.केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026
महिला आरक्षण व परिसीमन बिल अटके
लोकसभा स्पीकर ओूम बिरला ने बताया कि संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026, संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 पर सदन में 16 और 17 अप्रैल, 2026 को चर्चा हुई और यह चर्चा 21 घंटे 27 मिनट तक चली। उन्होंने यह भी बताया कि तीनों विधेयकों पर हुई चर्चा में 131 सदस्यों ने भाग लिया। उन्होंने आगे कहा कि संविधान संशोधन विधेयक सदन द्वारा पारित नहीं किया गया। श्री बिरला ने यह भी बताया कि 23 मार्च, 2026 को प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और भारत के सामने उभर रही चुनौतियों के संबंध में एक बयान दिया। सत्र के दौरान, 126 तारांकित प्रश्नों के उत्तर मौखिक रूप से दिए गए। श्री बिरला ने बताया कि शून्य काल के दौरान सदस्यों द्वारा कुल 326 लोक महत्व के मामले उठाए गए। सत्र के दौरान नियम 377 के तहत कुल 650 मामले उठाए गए। वहीं विभागीय संबंधित स्थायी समितियों द्वारा 73 रिपोर्टें प्रस्तुत की गईं और सदन के पटल पर 2089 पत्र रखे गए।
वामपंथी उग्रवाद पर विशेष चर्चा
30 मार्च, 2026 को नियम 193 के तहत “देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने के प्रयास” विषय पर एक अल्पकालिक चर्चा आयोजित की गई। यह चर्चा 6 घंटे 7 मिनट तक चली, और इसमें 36 सदस्यों ने भाग लिया। चर्चा का समापन केंद्रीय गृह मंत्री के उत्तर के साथ हुआ। बिरला ने यह भी बताया कि 16 अप्रैल, 2026 को पीठासीन अधिकारी ने सदन को भारत के 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर द्वारा सफलतापूर्वक ‘प्रथम क्रिटिकैलिटी’ (first criticality) प्राप्त करने की महत्वपूर्ण उपलब्धि के बारे में सूचित किया। उन्होंने यह भी बताया कि इस सत्र के दौरान, सदस्यों द्वारा 18 भारतीय भाषाओं में 181 बयान दिए गए, और उनका एक साथ अनुवाद सफलतापूर्वक किया गया।
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राज्यसभा के 270वें सत्र के समापन
संसद के बजट सत्र का भी समापन हो गया। संसद के तीन सत्रों में से, बजट सत्र का स्थान सर्वोपरि है। यह न केवल तीनों सत्रों में सबसे लंबा सत्र होता है, बल्कि राष्ट्र के विकास पथ को निर्धारित करने की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण भी है। इस सत्र के दौरान स्वीकृत किए गए बजटीय आवंटन, अनुमोदित की गई नीतियाँ और निर्धारित की गई प्राथमिकताएँ इन सभी का भारत के प्रत्येक नागरिक के जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। कुल मिलाकर, सदन की कार्यवाही 157 घंटे और 40 मिनट तक चली। इस सत्र की उत्पादकता 109.87 प्रतिशत रही। इस सत्र के दौरान, हमें 117 प्रश्न, 446 शून्य काल के मामले और 207 विशेष उल्लेख उठाने का अवसर मिला। इस सत्र में श्री हरिवंश जी को तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति के रूप में पुनः निर्वाचित होते हुए भी देखा गया।
‘पश्चिम एशिया की स्थिति’ पर चर्चा
उच्च सदन ने ‘भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते’ और ‘पश्चिम एशिया की स्थिति’ पर सरकार के वक्तव्यों का संज्ञान लिया। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों पर राष्ट्र के सामूहिक संकल्प को रेखांकित किया। इस सत्र में श्री हरिवंश जी को तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति के रूप में पुनः निर्वाचित होते हुए भी देखा गया।











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