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कार्यशाला में युवाओं ने सीखे टाई-एंड-डाई व जलरंग के गुर

लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। राज्य ललित कला अकादमी (उत्तर प्रदेश) एवं राष्ट्रीय कला मंच (मेरठ प्रांत) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 20 दिवसीय ‘ग्रीष्मकालीन कला कार्यशाला’ का चौथा दिन मंगलवार को श्री राम कॉलेज के ललित कला विभाग में बेहद उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यशाला के दौरान युवा छात्र-छात्राओं ने जलरंग चित्रकला, ऑप्टिकल इल्यूजन (दृष्टिभ्रम) तथा टाई-एंड-डाई जैसी विविध और जटिल कलात्मक विधाओं के माध्यम से अपनी अनूठी रचनात्मक अभिव्यक्तियों को कैनवास पर उतारा।

इस विशेष तकनीकी सत्र में मुख्य प्रशिक्षक मयंक सैनी एवं रजनीकांत के साथ बतौर अतिथि विशेषज्ञ पहुँचे मोहम्मद खालिद ने प्रतिभागी विद्यार्थियों को चित्रकला एवं विभिन्न आधुनिक कला तकनीकों की बारीकियों से रूबरू कराया। उन्होंने विद्यार्थियों को कला के व्यावहारिक, तकनीकी एवं सृजनात्मक पक्षों पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया, जिससे प्रतिभागियों को अपनी छिपी हुई कलात्मक क्षमताओं को पहचानने और उन्हें विकसित करने का बेहतरीन अवसर प्राप्त हुआ।

इस 20 दिवसीय प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को कला की विभिन्न विधाओं का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है, जो उनके रचनात्मक कौशल को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध हो रहा है। इसके साथ ही, यह कार्यशाला उन्हें केवल शौकिया कलाकार बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें कला के क्षेत्र में मौजूद व्यावसायिक संभावनाओं और भविष्य के करियर आयामों से भी गहराई से परिचित करा रही है।

इस अवसर पर कॉलेज के ललित कला विभाग के निदेशक डॉ. मनोज धीमान ने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों एवं आगंतुक कलाकारों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास, सृजनात्मक सोच तथा व्यावसायिक दक्षता को विकसित करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कार्यशाला के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि युवा कलाकार कला के क्षेत्र में अपने भविष्य की संभावनाओं को किस प्रकार पहचान सकते हैं और उन्हें एक सकारात्मक व आत्मनिर्भर दिशा प्रदान कर सकते हैं। यह पूरा आयोजन राज्य ललित कला अकादमी, लखनऊ के उन मूल उद्देश्यों के बिल्कुल अनुरूप है, जिनका लक्ष्य कला को जन-जन तक पहुँचाना, समाज में सृजनात्मक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना तथा युवाओं के लिए रोजगारपरक अवसरों का विस्तार करना है।

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