
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला सहकारी बैंक मुजफ्फरनगर की प्रबंध समिति के गठन को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बैंक चेयरमैन ठाकुर रामनाथ सिंह और दो अन्य निदेशकों (पंकज पाल व बृजेंद्र सिंह) को पद पर बने रहने के लिए अयोग्य ठहराया है। न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला और न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर की पीठ ने बुढ़ाना निवासी सचिन कुमार जैन की रिट याचिका को स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया।
मामले की मुख्य वजह प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (बी-पैक्स) का विभाजन बनी। रामनाथ सिंह, पंकज पाल और बृजेंद्र सिंह जिन बी-पैक्स (खेड़ा मस्तान, मुजफ्फरनगर पश्चिमी और पीनना) के प्रतिनिधि के तौर पर बैंक के सामान्य निकाय और प्रबंध समिति में निर्वाचित हुए थे।
हाईकोर्ट ने यूपी सहकारी समिति नियमावली का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि समिति का विभाजन होते ही संबंधित व्यक्ति का प्रतिनिधित्व स्वतः समाप्त हो जाता है। जब प्रतिनिधि की मूल पात्रता ही खत्म हो गई, तो प्रबंध समिति और चेयरमैन पद पर बने रहना संभव नहीं है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “नींव हट जाने के बाद ऊपरी ढांचा गिरना तय है।”
उधर, फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ठाकुर रामनाथ सिंह ने कहा कि चुनाव शासन व नियमों के तहत हुआ था और वह इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।
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