
‘कंज्यूमर वॉयस’ के अभियान में 700 से अधिक लोगों तक जागरूकता संदेश पहुँचाया
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली। भोजन की बर्बादी को रोकने और साझा संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “टुगेदर अगेंस्ट फूड वेस्ट—ए शेयरिंग कम्युनिटी इन एक्शन” अभियान चलाया। उपभोक्ता अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ‘कंज्यूमर वॉयस’ ने ‘ग्रीन एक्शन वीक 2026’ के तहत आयोजित इस दो महीने लंबे अभियान में कार्यशालाओं, डोर-टू-डोर आउटरीच और सोशल मीडिया के जरिए दिल्ली भर के 700 से अधिक लोगों तक जागरूकता संदेश पहुँचाया गया। यह अभियान कंज्यूमर वॉयस की प्रोजेक्ट लीड रिंकी शर्मा और उनकी टीम द्वारा स्थानीय विशेषज्ञों के सहयोग से संचालित किया गया।


बचे हुए भोजन से ऐसे बनाए नए व्यंजन
महिलाओं ने बचे हुए भोजन को दोबारा इस्तेमाल करने और खाद्य पदार्थों के सही भंडारण (स्टोरेज) के तरीके जहांगीरपुरी में आयोजित महिला सामुदायिक कार्यशाला के दौरान साझा किए। महिलाओं ने अतिरिक्त भोजन को फेंकने के बजाय पड़ोसियों के साथ साझा करने पर सहमति व्यक्त की और सब्जियों के छिलकों/अवशेषों से कलाकृतियाँ भी बनाईं। इस दौरान एक पुरुष प्रतिनिधि ने बची हुई रोटियों से झटपट पिज्जा बनाकर दिखाया, जिससे यह संदेश गया कि भोजन की बचत केवल महिलाओं की नहीं, बल्कि घर के हर सदस्य की जिम्मेदारी है।

लाजपत नगर और आर्य हंस राज मॉडल स्कूल भी चला अभियान
स्कूल कार्यशाला: भलस्वा स्थित ‘आर्य हंस राज मॉडल स्कूल’ में कक्षा 8 के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने क्विज और समूह चर्चा में भाग लिया। इसमें भोजन की बर्बादी के कारणों और युवाओं की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया।
लाजपत नगर में आउटरीच: ग्रीन एक्शन वीक के दौरान कंज्यूमर वॉयस ने लाजपत नगर स्थित अपने कार्यालय में आम नागरिकों के लिए जागरूकता सत्र आयोजित किए और टीम के सदस्यों ने घर-घर (डोर-टू-डोर) जाकर लोगों को भोजन बचाने के प्रति जागरूक किया।
भोजन साझा करना इसलिए है जरुरी?
घरेलू स्तर पर प्रतिदिन भारी मात्रा में भोजन फेंका जाता है, जबकि उसका उपयोग या पुनरुत्पादन किया जा सकता है। भोजन की योजना बनाना, सही भंडारण, सही मात्रा में पकाना और बचे हुए भोजन को साझा करना जैसी छोटी-छोटी आदतें बड़ा बदलाव ला सकती हैं। कंज्यूमर वॉयस की प्रोजेक्ट लीड रिंकी शर्मा ने कहा कि भोजन की बर्बादी केवल रसोई की समस्या नहीं है, यह एक सामुदायिक समस्या है और समुदाय मिलकर ही इसका समाधान कर सकते हैं। जब पड़ोसी, स्कूल और परिवार भोजन और विचारों को साझा करते हैं, तो भोजन की बर्बादी कम होती है। वही कंज्यूमर वॉयस की वरिष्ठ प्रबंधक (प्रोजेक्ट्स) एकता पुरोहित ने कहा कि जब लोग अपनी जरूरतों के अनुसार इस्तेमाल करना और अतिरिक्त सामग्री को साझा करना सीखते हैं, तो भोजन बचाना पूरे समाज की आदत बन जाता है। संस्था ने स्कूलों और उपभोक्ताओं के लिए आसान टिप्स वाली सचित्र पुस्तिकाएं भी तैयार की हैं।
दुनिया में चीन के बाद दूसरे स्थान पर भारत
यूएन पर्यावरण कार्यक्रम की ‘फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट 2024’ के अनुसार भारत में हर साल लगभग 7.82 करोड़ टन (78.2 मिलियन टन) भोजन घरों में बर्बाद होता है, जो प्रति व्यक्ति औसतन 55 किलोग्राम है। घरेलू स्तर पर भोजन बर्बादी के मामले में भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। यह स्थिति तब है जब ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2024’ में भारत 127 देशों में 105वें स्थान पर है, जो गंभीर भूख की श्रेणी में आता है। यह अभियान स्वीडिश सोसाइटी फॉर नेचर कंजर्वेशन के ‘ग्रीन एक्शन वीक’ और ‘कंज्यूमर इंटरनेशनल’ के सहयोग से आयोजित किया गया था।











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