
सेना और पुलिस प्रतिष्ठानों पर हमले की थी खौफनाक साजिश,
जवान की हत्या का वीडियो बनाने का मिला था टास्क, 6 लाख में तय हुई थी डील
लोकपथ लाइव, लखनऊ। उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते ने राजधानी लखनऊ में एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए 4 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है। यह गिरोह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से जुड़े कुख्यात हैंडलर शहजाद भट्टी के इशारे पर भारत में किसी बड़े सैन्य या पुलिस प्रतिष्ठान पर आत्मघाती हमले और लक्षित हत्या की साजिश रच रहा था।


पंजाब के रहने वाले हैं तीन आरोपी, नाबालिग भी शामिल
एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए संदिग्धों की पहचान पंजाब निवासी गगनदीप सिंह, रजत कुमार और क्रिश के रूप में हुई है, जबकि इनका चौथा साथी एक नाबालिग है। प्राथमिक पूछताछ में सामने आया है कि ये चारों सीमा पार बैठे पाकिस्तानी हैंडलर शहजाद भट्टी के लगातार संपर्क में थे और उसी के दिए निर्देशों पर काम कर रहे थे।

जवान की हत्या कर वीडियो बनाने की थी योजना
जांच एजेंसियों के अनुसार, भट्टी नेटवर्क ने इन संदिग्धों को भारत में किसी सेना या पुलिस के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान को निशाना बनाने का टास्क सौंपा था। साजिश के तहत हमले के दौरान सुरक्षाकर्मी (जवान) की हत्या कर उसका वीडियो रिकॉर्ड करना था, ताकि उस वीडियो का इस्तेमाल कर देश में दहशत फैलाई जा सके और सोशल मीडिया के जरिए प्रचार किया जा सके।
विदेशी पिस्टल, 20 कारतूस बरामद; लखनऊ में ही मिले थे हथियार
यूपीएटीएस ने आरोपियों के कब्जे से एक अत्याधुनिक विदेशी पिस्टल और 20 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। चौकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि हथियारों की यह खेप इन्हें किसी सीमावर्ती इलाके से नहीं, बल्कि लखनऊ में ही भट्टी नेटवर्क से जुड़े एक लोकल एसेट (स्थानीय मददगार) ने मुहैया कराई थी। एटीएस अब उस स्थानीय मददगार की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
6 लाख रुपये में तय हुआ था खून का सौदा
पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि इस पूरी आतंकी साजिश और टारगेट किलिंग के लिए 6 लाख रुपये की डील तय हुई थी। पाकिस्तानी हैंडलर भट्टी द्वारा इस रकम में से 3 लाख रुपये की पहली किश्त इन चारों को एडवांस के तौर पर मिल भी चुकी थी। एटीएस की इस समयबद्ध कार्रवाई से उत्तर प्रदेश में एक बड़ी अनहोनी और आतंकी हमला टल गया है। फिलहाल पुलिस और खुफिया एजेंसियां पकड़े गए आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही हैं ताकि इनके नेटवर्क की अन्य कड़ियों और यूपी में मौजूद स्थानीय मददगारों का पता लगाया जा सके।











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