
राजधानी में सिर्फ 3 फीसदी आबादी वाले ट्रक-बस फैला रहे हैं 36 प्रतिशत प्रदूषण
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में हर साल सर्दियों के मौसम में गहराने वाले वायु प्रदूषण के संकट से निपटने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पुराने ट्रकों और बसों के प्रतिस्थापन (रिप्लेसमेंट) के लिए एक व्यापक दो वर्षीय योजना को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना का वित्तपोषण आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) द्वारा किया जाएगा, जबकि इसका कार्यान्वयन सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय मिलकर करेंगे।


इस पूरी महायोजना के लिए 9,585 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 5,041 करोड़ रुपये होगी, जबकि भागीदार राज्यों (दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश) द्वारा कर छूट के रूप में अनुमानित 1,601 करोड़ रुपये का योगदान दिया जाएगा। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की गंभीरता को ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) और टीईआरआई (TERI) की रिपोर्ट के जरिए समझा जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीआर में कुल वाहनों की संख्या में ट्रकों और बसों की हिस्सेदारी महज 3 प्रतिशत है, लेकिन परिवहन क्षेत्र से निकलने वाले खतरनाक पीएम 2.5 उत्सर्जन में इनका हिस्सा 36 प्रतिशत है।

प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने का खाका
वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार, एक पुराना (प्री-बीएस) हेवी-ड्यूटी वाहन अकेले 14 नए बीएस-VI वाहनों के बराबर धुआं उगलता है। यहाँ तक कि एक बीएस-IV वाहन भी बीएस-VI वाहन की तुलना में 2.7 गुना अधिक उत्सर्जन करता है। यही वजह है कि सरकार ने इन वाहनों को सड़कों से हटाने का सख्त और प्रोत्साहन-आधारित खाका तैयार किया है।
किसे मिलेगा लाभ और क्या हैं शर्तें?
इस योजना से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लगभग 2.07 लाख वाहन मालिकों (1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसें) को सीधा लाभ पहुंचेगा। इसके तहत नियम इस प्रकार तय किए गए हैं। बीएस-III या उससे पुराने वाहनों को पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधाओं (RVSF) पर अनिवार्य रूप से स्क्रैप कराना होगा। वहीं बीएस-IV वाहन: इन्हें एनसीआर के बाहर उन शहरों/कस्बों में बेचा या स्क्रैप किया जा सकता है जो ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम’ (NCAP) के दायरे में नहीं आते। दिल्ली में इस योजना के तहत खरीदे जाने वाले हल्के मालवाहक वाहन अनिवार्य रूप से ‘इलेक्ट्रिक’ होने चाहिए, जबकि बसें केवल ‘बीएस-VI सीएनजी’ या ‘इलेक्ट्रिक’ होनी चाहिए। सभी सरकारी वाहनों को इस योजना से बाहर रखा गया है।
पूरी तरह डिजिटल होगी प्रक्रिया
भ्रष्टाचार और देरी को समाप्त करने के लिए इस योजना का कार्यान्वयन पूरी तरह से एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। इस पोर्टल पर रियल-टाइम पात्रता जांच, ऑटोमैटिक ब्याज सब्सिडी और ईंधन वाउचर क्रेडिट की सुविधा होगी। योजना की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसकी निगरानी खुद कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक अधिकार प्राप्त समिति करेगी, जिसमें नीति आयोग के सीईओ और कई मंत्रालयों के सचिव व राज्यों के मुख्य सचिव शामिल होंगे। वहीं जिला स्तर पर जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट इसे जमीन पर लागू करने के लिए जिम्मेदार होंगे।











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