
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। अपने फैसलों और ताबड़तोड़ मृत्युदंड (फांसी की सजा) सुनाए जाने को लेकर देशभर में चर्चा में रहे फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की न्यायिक जिम्मेदारी बदल दी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा शुक्रवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, उन्हें अब परिवार न्यायालय में अपर प्रधान न्यायाधीश के पद पर तैनात किया गया है।
23 मामलों में सुना चुके हैं मृत्युदंड
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर मुजफ्फरनगर में अपने कार्यकाल के दौरान कुल 23 दोषियों को फांसी की सजा सुना चुके हैं। हाल ही में 7 सितंबर 2026 को दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक सनसनीखेज मामले में पत्नी को जिंदा जलाने वाले दोषी नदीम को उन्होंने मृत्युदंड सुनाया था, जो मुजफ्फरनगर में उनका 23वां फांसी का फैसला रहा। इसके अलावा, बरेली और अन्य जगहों पर अपनी पिछली तैनाती के दौरान भी वह 13 दोषियों को मौत की सजा सुना चुके हैं। उनके पूरे न्यायिक सेवाकाल में अब तक 35 मामलों में मृत्युदंड सुनाए जाने का रिकॉर्ड दर्ज है।
जिले में तीन न्यायिक अधिकारियों के तबादले
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद मुजफ्फरनगर में तीन प्रमुख न्यायिक अधिकारियों की तैनाती में बदलाव किया गया है। इसमें न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर को फास्ट ट्रैक कोर्ट से ट्रांसफर कर इन्हें परिवार न्यायालय, मुजफ्फरनगर में अपर प्रधान न्यायाधीश बनाया गया है।न्यायाधीश मंजुला भलोटिया को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश को फास्ट ट्रैक कोर्ट में तैनात किया गया है, जहाँ वे महिला अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिव कुमारी को 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत गठित न्यायालय में भेजा गया है, जहाँ वे जज रवि कुमार दिवाकर का स्थान लेंगी।
कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने तीनों न्यायिक अधिकारियों को अपने वर्तमान पद का कार्यभार सौंपकर जल्द से जल्द नई तैनाती वाले पदों पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, कार्यभार सौंपने और ग्रहण करने से संबंधित प्रमाण-पत्र सहायक रजिस्ट्रार (सर्विसेज) को भौतिक रूप से और आधिकारिक ईमेल के माध्यम से भेजने को कहा गया है।
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