
राहुल, ममता, अखिलेश और उद्धव बना रहे हैं साझा रणनीति, डीएमके व आप ने बैठक से किया किनारा
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत और साझा मोर्चा तैयार करने के लिए विपक्षी दलों के गठबंधन ‘INDIA ब्लॉक’ की बेहद अहम और बड़ी बैठक सोमवार को देश की राजधानी दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में शुरू हो गई है। दोपहर 12 बजे से जारी इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी राज्यों के विधानसभा चुनावों और साल 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर सरकार के खिलाफ एक ठोस और दीर्घकालिक रणनीति तैयार करना है। जून 2024 के बाद यह पहला मौका है जब गठबंधन के तमाम बड़े चेहरे एक मंच पर आधिकारिक रूप से आमने-सामने बैठे हैं।


दिग्गजों का जमावड़ा, 22 दल शामिल
इस महाबैठक में विपक्ष की एकजुटता दिखाने के लिए देश के कई कद्दावर नेता दिल्ली पहुंचे हैं। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, उनके साथ अभिषेक बनर्जी, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव और शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे समेत कुल 22 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। बैठक में महंगाई, बेरोजगारी, केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग और संवैधानिक संस्थाओं की सुरक्षा जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

डीएमके और आप के झटके से बिखराव के संकेत
एक तरफ जहां 22 दल एकजुटता का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस बैठक से दो बड़े सहयोगियों द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और आम आदमी पार्टी के बाहर रहने से गठबंधन की दरारें भी उजागर हो गई हैं। तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके और दिल्ली-पंजाब में सरकार चला रही आप ने इस बैठक से पूरी तरह दूरी बना ली है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों ही दलों ने कांग्रेस के स्थानीय रुख और नेतृत्व शैली पर गंभीर आरोप लगाते हुए गठबंधन से अलग होने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं, जिसे विपक्ष के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा का पोस्टर वॉर: ‘जो आपस में लड़ रहे, वो हमसे क्या लड़ेंगे?’
बैठक शुरू होने से ठीक पहले दिल्ली की राजनीति में उस वक्त गरमाहट बढ़ गई, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली की सड़कों और बैठक स्थल के आसपास कई तीखे पोस्टर लगा दिए। इन पोस्टरों में इंडिया गठबंधन के नेताओं द्वारा पूर्व में एक-दूसरे के खिलाफ दिए गए कड़वे बयानों और बयानों के स्क्रीनशॉट छापे गए हैं। बीजेपी ने इन पोस्टरों के जरिए सीधा सवाल दागा है कि जो नेता अपने राज्यों में एक-दूसरे के खून के प्यासे हैं और आपस में ही लड़ रहे हैं, वे भला एकजुट होकर बीजेपी का मुकाबला कैसे कर पाएंगे?”
आगे की राह: चुनौतियां और संसद में घेराबंदी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक के जरिए विपक्ष भले ही यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह मरा नहीं है और एकजुट है, लेकिन डीएमके और आप जैसी मजबूत क्षेत्रीय पार्टियों का छिटकना गठबंधन के भविष्य पर सवालिया निशान लगाता है। फिलहाल, अंदर चल रही बैठक में इस बात पर भी सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है कि आगामी संसद सत्र के दौरान सभी विपक्षी दल मिलकर फ्लोर को-ऑर्डिनेशन (सदन के भीतर समन्वय) कैसे करेंगे, ताकि सरकार को विधायी स्तर पर कड़ा जवाब दिया जा सके।











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