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शुकतीर्थ में हनुमद्धाम पीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर स्वामी केशवानन्द जी महाराज हुए ब्रह्मलीन, आध्यात्मिक जगत में शोक की लहर

सन् 1988 से शुकतीर्थ के सांस्कृतिक व सामाजिक उत्कर्ष के स्तंभ रहे महाराज
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर: जनपद की सुप्रसिद्ध पौराणिक और भागवत उद्गम स्थली तीर्थ नगरी शुकतीर्थ से एक दुखद खबर सामने आई है। शुकतीर्थ के प्रसिद्ध हनुमंतधाम आश्रम के अधिष्ठाता महामंडलेश्वर एवं हनुमद्धाम पीठाधीश्वर 1008 स्वामी केशवानंद सरस्वती महाराज का रविवार सुबह 3:30 बजे मुजफ्फरनगर के आरोग्यम अस्पताल में निधन हो गया। धार्मिक एवं आध्यात्मिक चेतना के जीवंत प्रतीक, श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के परम पूज्य महामण्डलेश्वर के ब्रह्मलीन होने से पूरी तीर्थ नगरी, संत समाज और उनके मुजफ्फरनगर सहित देश-विदेश में बसे उनके लाखों श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई है। अखाड़े और पीठ के सूत्रों के अनुसार, पूज्य महाराज श्री की भू-समाधि आज दोपहर 3:30 बजे हनुमद्धाम परिसर में संतों और भक्तों की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की जाएगी।

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एक युग का अंत: साधना और राष्ट्रधर्म का अद्भुत समन्वय
स्वामी केशवानन्द जी महाराज का देवलोकगमन केवल एक संत का जाना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक संरक्षण और एक आत्मीय अभिभावक के युग का अंत है। उनके व्यक्तित्व में संतत्व की करुणा, कुशल संगठनकर्ता की दक्षता और राष्ट्रधर्म के प्रति अदम्य समर्पण का अद्भुत समन्वय विद्यमान था। वे केवल मंच से प्रेरणा देने वाले संत नहीं थे, बल्कि धरातल पर उतरकर प्रत्येक व्यवस्था का सूक्ष्म निरीक्षण करने वाले कर्मयोगी थे।

हनुमद्धाम के प्रकल्पों में रहा अद्वितीय योगदान
सन् 1988 के आसपास से क्षेत्र में सक्रिय रहे महाराज श्री का सान्निध्य शुकतीर्थ के आध्यात्मिक उत्कर्ष में ऐतिहासिक रहा। हनुमद्धाम के विविध सांस्कृतिक और सामाजिक उपक्रमों को उन्होंने अपने कुशल मार्गदर्शन से सींचा। क्षेत्र में उनके प्रमुख अवदानों को हमेशा याद किया जाएगा। पूज्य विजय कौशल जी महाराज की श्रीरामकथा का भव्य आयोजन और विराट हिन्दू संत सम्मेलन का सफल क्रियान्वयन। क्षेत्र में नई पीढ़ी के निर्माण के लिए सरस्वती शिशु मंदिर एवं विद्या मंदिर की स्थापना में उनका पुण्य प्रयास अद्वितीय रहा। हनुमद्धाम में अत्यंत दुर्लभ और आस्था का केंद्र बनी ‘नक्षत्र वाटिका’ का सृजन उन्हीं की दूरदर्शिता का परिणाम था।प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला भव्य हनुमत जयंती महोत्सव उनके कुशल संगठनात्मक कौशल की गवाही देता था।

भाषा की सीमा से परे है वियोग की वेदना
महाराज श्री के महाप्रयाण पर उनके निकटवर्ती सेवादारों और अनुयायियों ने अत्यंत भावुक शब्दों में अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि वास्तव में कुछ वियोग ऐसे होते हैं, जिनकी वेदना भाषा की सीमा से परे, केवल हृदय की निस्तब्धता में ही अनुभव की जा सकती है। वे सही मायनों में कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास और उत्तरदायित्व की भावना का संचार करने वाले तपोनिष्ठ युगपुरुष थे।

श्रद्धा सुमन के लिए संतो व श्रद्धालुओंका तांता
शुकतीर्थ और हनुमद्धाम के आध्यात्मिक विकास में महाराज श्री की भूमिका युगों तक स्मरणीय रहेगी। उनका त्यागमयी जीवन भावी पीढ़ियों के लिए साधना, सेवा और सांस्कृतिक जागरण का अमर प्रेरणास्रोत बना रहेगा। स्थानीय प्रशासन और हनुमद्धाम पीठ द्वारा दोपहर को होने वाले समाधि कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, जहां देश के विभिन्न अखाड़ों के पूज्य संत एवं राजनेता महाराज श्री को अंतिम विदाई देने पहुंच रहे हैं। उनमें उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल, महामंडलेश्वर स्वामी गोपाल दास महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी विनय स्वरूपानंद महाराज, स्वामी गीतानंद महाराज, स्वामी आनंद स्वरूप महाराज, स्वामी विज्ञानंद महाराज औरआश्रम ट्रस्ट अध्यक्ष आर.के. टंडन सहित कई प्रमुख हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इनमें जितेंद्र वर्मा, राजेंद्र कुमार, जियालाल, कैलाश गोयल, कृष्ण बंसल, राघव स्वरूप, विवेक अग्रवाल, गिरिराज किशोर, सतीश अग्रवाल, दिलीप अग्रवाल, तरुण अग्रवाल, राजीव अग्रवाल और आनंद स्वरूपानंद महाराज भी शामिल थे।

विधि-विधान से की जाएगी भू-समाधि की प्रक्रिया
स्वामी जी महाराज के ब्रह्मलीन होने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। आश्रम प्रबंधन और अखाड़े की परंपराओं के अनुसार, ब्रह्मलीन स्वामी केशवानंद सरस्वती जी महाराज का अंतिम संस्कार भू-समाधि के माध्यम से रविवार शाम पांच बजे किया जाएगा। उनकी समाधि की प्रक्रिया हनुमान धाम परिसर में ही पूरे वैदिक मंत्रोच्चारण, संत परंपराओं और अखाड़े के नियमों के तहत विधि-विधान से संपन्न की जाएगी।

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