
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर । जनपद में आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) की आड़ में प्लास्टिक और अपमिश्रित कचरे की अवैध आवक फिर से शुरू हो गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों से आंख-मिचौली का खेल खेलते हुए दिल्ली से आने वाले कचरे से लदे वाहन रात के अंधेरे में जिले की सीमाओं में बेखौफ प्रवेश कर रहे हैं। इस अवैध डंपिंग और पेपर मिलों द्वारा इसे ईंधन के रूप में धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जाने के कारण क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर जानलेवा हो गया है। विशेषकर मखियाली सहित आसपास के अन्य ग्रामीण इलाकों में पेपर मिलों से निकलने वाले जहरीले धुएं और उससे होने वाले भयानक वायु प्रदूषण के कारण स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है, जिसके चलते क्षेत्र से पलायन का गंभीर मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है।
इस पूरे मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की मॉनिटरिंग और निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल साबित हो रहा है, जिसे स्थानीय स्तर पर एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही माना जा रहा है। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले भी आरडीएफ की आड़ में जिले की विभिन्न पेपर मिलों में पहुंच रहे इस खतरनाक कचरे और उसे भट्टियों में धड़ल्ले से जलाए जाने पर भारी बवाल हो चुका है। उस समय हुए हंगामे के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़े-बड़े दावों और जांच की बात तो कही गई थी, लेकिन धरातल पर स्थितियां जस की तस बनी हुई हैं। खतौली और मुजफ्फरनगर के बीच रात के सन्नाटे में बेखौफ दौड़ते इन कचरा वाहनों की वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जो प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही है।
कचरे के इस अवैध परिवहन को सीधे तौर पर स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ माना जा रहा है। मामले को लेकर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी गीतेश चंद्रा का कहना है कि आरडीएफ की अनुमति उच्च स्तर से प्रदान की गई है, लेकिन उसकी आड़ में प्रतिबंधित व जहरीले कचरे का परिवहन होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जल्द ही संदिग्ध पेपर मिलों की सघन जांच कर मॉनिटरिंग की जाएगी और अवैध डम्पिंग जोन की जानकारी जुटाकर उनका औचक निरीक्षण कराया जाएगा।
नीचे वीडियो में देखे रात में दौड़ता कचरे का वाहन
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