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पश्चिम बंगाल की सत्ता में ‘शिखंडी’ का अंत, सुवेंदु युग का उदय, मुख्यमंत्री की ली शपथ

ऐतिहासिक शपथ: ब्रिगेड ग्राउंड में पहली बार गूंजा ‘जय श्री राम’ और ‘वंदे मातरम’ का सरकारी उद्घोष
बांग्ला में ईश्वर के नाम की शपथ लेकर सुवेंदु बने पहले, पीएम ने टैगोर को दी श्रद्धांजलि
लोकपथ लाइव, कोलकाता: पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में 09 मई 2026 का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। कोलकाता का विशाल ब्रिगेड परेड ग्राउंड आज भगवा रंग में सराबोर नजर आया, जब सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल आरएन रवि ने उन्हें बांग्ला भाषा में शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ चार विधायकों दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तिनिया, खुदीराम टुडू, निशिथ घोष ने मंत्री पद की शपथ ली। यह पहली बार है जब आजादी के बाद राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है।

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प्रधानमंत्री की उपस्थिति में हुआ शक्ति प्रदर्शन
इस गौरवशाली अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने मंच से विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी 165वीं जयंती पर नमन करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष और एनडीए शासित राज्यों के 20 मुख्यमंत्री मौजूद रहे। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद सुवेंदु अधिकारी ने प्रधानमंत्री मोदी के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया, जो राज्य में एक नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत का संकेत है। इस गौरवशाली अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने मंच से विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी 165वीं जयंती पर नमन करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

मंत्रिमंडल का गठन: पांच दिग्गजों ने ली शपथ
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ भाजपा के पांच प्रमुख चेहरों को कैबिनेट में जगह दी गई है, जो राज्य के अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
दिलीप घोष: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और संगठन के मजबूत स्तंभ
अग्निमित्रा पॉल: प्रखर वक्ता और महिला नेतृत्व का चेहरा
अशोक कीर्तिनिया: मतुआ समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधि
खुदीराम टुडू: जनजातीय समाज की आवाज
निशिथ घोष : युवा और जमीनी स्तर के नेता

सुवेंदु का सफर: संन्यास की राह छोड़ राजनीति को चुना
साल 1970 में पूर्व मेदिनीपुर के कोंतली गांव में जन्मे सुवेंदु का बचपन से ही झुकाव आध्यात्म की ओर था। वे हर शनिवार रामकृष्ण मिशन जाते थे और घर में जमा सिक्के भी वहां दान कर आते थे। उनके घरवाले डरते थे कि कहीं बेटा संन्यासी न बन जाए। शादी न करने के संकल्प साथ सुवेंदु ने संन्यास तो नहीं लिया, लेकिन समाज सेवा के लिए राजनीति को चुना। उन्होंने संकल्प लिया कि वे आजीवन अविवाहित रहकर जनता की सेवा करेंगे। इसलिए 80 के दशक के अंत में कांथी के प्रभात कुमार कॉलेज से छात्र राजनीति की शुरुआत करने वाले सुवेंदु ने धीरे-धीरे पूर्व मेदिनीपुर और फिर पूरे बंगाल में अपनी एक सशक्त पहचान बनाई, जिसका परिणाम आज उनके मुख्यमंत्री बनने के रूप में सामने आया है।

जब पीएम ने छुए 98 साल के कार्यकर्ता के पैर
शपथ ग्रहण समारोह का सबसे भावुक क्षण वह था जब प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के वयोवृद्ध कार्यकर्ता माखनलाल सरकार (98 वर्ष) को सम्मानित किया। प्रधानमंत्री मंच पर आते ही प्रोटोकॉल तोड़कर सीधे माखनलाल जी के पास पहुंचे। उन्होंने उन्हें शॉल ओढ़ाया और झुककर उनके पैर छुए। इस दौरान माखनलाल सरकार भावुक हो गए और उन्होंने प्रधानमंत्री को काफी देर तक गले लगाए रखा। यह सम्मान 1952 से राष्ट्रवाद की मशाल थामे कार्यकर्ताओं के प्रति भाजपा की कृतज्ञता का प्रतीक बना। माखनलाल सरकार 1952 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कश्मीर आंदोलन में शामिल थे और जेल भी गए थे। पीएम मोदी ने उनसे आशीर्वाद लिया, जिससे यह संदेश गया कि नई सरकार अपने पुराने संघर्षशील कार्यकर्ताओं के बलिदान को नहीं भूली है।

 

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