
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। जनपद में औद्योगिक प्रदूषण की निगरानी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की टीम जब चिमनियों पर रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) की जांच करने जमीन पर उतरी, तो 12 में से 6 औद्योगिक इकाइयां मौके पर अस्तित्व में ही नहीं मिलीं। इन इकाइयों का रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में तो दर्ज था, लेकिन धरातल पर इनका नामोनिशान नहीं मिला।


मंगलवार को सीपीसीबी के वैज्ञानिक मुकुल मणि त्रिपाठी के नेतृत्व में स्थानीय प्रदूषण विभाग की टीम ने जनपद की चिन्हित 12 इकाइयों का औचक निरीक्षण किया। इस टीम में स्थानीय अधिशासी अभियंता कुलदीप सिंह और जेई संध्या शर्मा भी शामिल रहे। जांच का मुख्य उद्देश्य उन फैक्ट्रियों की स्थिति जानना था, जिन्होंने बार-बार निर्देशों के बावजूद अपनी चिमनियों पर ओसीईएमएस (ऑनलाइन निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली) यंत्र स्थापित नहीं किए हैं।

सर्वे के दौरान टीम तब हैरान रह गई जब भागेश्वरी स्टील, त्रीमूर्ति इंजीनियरिंग, त्रीमूर्ति कास्टिंग, वर्धमान श्रमिक, विश्वरतन श्रमिक और एमआर नामक छह इकाइयां मौके पर संचालित होना तो दूर, अस्तित्व में भी नहीं पाई गईं। इसके अलावा तीन अन्य इकाइयां (एनआर, जेवी और एक अन्य) पहले से सील मिलीं, जिनके बिजली कनेक्शन भी कटे हुए थे। शेष तीन इकाइयों पर भी पूर्व में लगी विभागीय सील बरकरार मिली।
क्या है ओसीईएमएस (OCEMS)?
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी गीतेश चंद्रा ने बताया कि ओसीईएमएस एक अत्याधुनिक प्रणाली है जिसे फैक्ट्रियों की चिमनियों पर लगाया जाता है। यह यंत्र धुएं और प्रदूषण के स्तर की सीधी जानकारी (रियल टाइम डेटा) सीधे बोर्ड के सर्वर को भेजता है।
अधिकारियों के अनुसार, जिन इकाइयों ने नियमों की अनदेखी की है या जो अस्तित्व में न होकर भी दस्तावेजों में दर्ज हैं, उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। विभाग अब इन डिफॉल्टरों पर भारी जुर्माना लगाने की तैयारी कर रहा है।












Total views : 306593