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मुजफ्फरनगर में डिस्टलरी विवाद भड़का: आधी रात को एमडी की कोठी पर मजदूरों का धावा

15 करोड़ रुपये के बकाया वेतन को लेकर फूटा गुस्सा, फैक्ट्री बंद होने से 1500 परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर: जनपद के मंसूरपुर स्थित प्रतिष्ठित सरशादी लाल डिस्टलरी का विवाद एक बार फिर सुलग उठा है और इस बार लड़ाई सीधे प्रबंधन के दरवाजे तक पहुंच गई है। वर्षों से बकाया वेतन न मिलने और फैक्ट्री बंद होने से दाने-दाने को मोहताज नाराज कर्मचारियों, सप्लायरों और ठेकेदारों ने शनिवार रात को उग्र रुख अख्तियार कर लिया। आक्रोशित सैकड़ों मजदूरों ने डिस्टलरी के मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) प्रभात स्वरूप की जानसठ रोड स्थित आलीशान कोठी के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। रातभर चले इस हंगामे के कारण इलाके में तनाव की स्थिति बनी रही।

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1500 परिवारों पर आर्थिक संकट, 13 कर्मचारियों ने तोड़ा दम
डिस्टलरी मजदूर यूनियन के कद्दावर नेता अमित राठी के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन के दौरान प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। मजदूर नेताओं ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री बंद होने के कारण लगभग 1500 लोगों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। डिस्टलरी प्रशासन पर करीब 250 कर्मचारियों का लगभग 15 करोड़ रुपये का वेतन बकाया है। यूनियन ने एक बेहद संवेदनशील और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भारी आर्थिक तंगी और मानसिक अवसाद के चलते इस लंबे संघर्ष के दौरान अब तक 13 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है, जिसके लिए सीधे तौर पर प्रबंधन जिम्मेदार है।

बेनतीजा रही श्रम विभाग की कवायद, सीएम तक पहुंची गुहार
यूनियन नेता अमित राठी ने बताया कि कर्मचारी अपने हक की लड़ाई पिछले कई महीनों से लड़ रहे हैं। करीब छह महीने पहले श्रम विभाग के हस्तक्षेप के बाद द्विपक्षीय वार्ता भी आयोजित की गई थी, लेकिन प्रबंधन के अड़ियल रवैये के कारण कोई नतीजा नहीं निकला। इससे पहले कर्मचारी डिस्टलरी परिसर के भीतर ही लगातार 43 दिनों तक शांतिपूर्ण धरने पर बैठे रहे। इस दौरान सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक अपनी बात पहुंचाने के साथ-साथ कई प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे गए, मगर शासन-प्रशासन के स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

अधिकारियों का फोन नहीं उठा रहे एमडी
शनिवार रात को कोठी के बाहर शुरू हुए इस धरने की भनक लगते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया। प्रदर्शनकारियों ने जिला मजिस्ट्रेट (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पूरे घटनाक्रम की गंभीरता से अवगत कराया। मौके पर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे सिटी मजिस्ट्रेट ने जब फोन पर एमडी प्रभात स्वरूप से संपर्क साधने का प्रयास किया, तो उन्होंने किसी का फोन तक नहीं उठाया।

उग्र आंदोलन की चेतावनी
मजदूरों ने दोटूक लहजे में चेतावनी दी है कि वे अब और इंतजार करने तथा खोखले आश्वासनों को सुनने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनके खून-पसीने की कमाई के एक-एक पैसे का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक एमडी की कोठी के बाहर उनका यह अनिश्चितकालीन संघर्ष और डेरा जारी रहेगा।

 क्यों सुलग रही है गुस्से की चिंगारी?
कुल बकाया राशि: ₹15 करोड़ (लगभग 250 कर्मचारियों का वेतन)
प्रभावित लोग: 1500 से अधिक कर्मचारी, ठेकेदार और सप्लायर परिवार।
पूर्व का संघर्ष: डिस्टलरी परिसर में पूर्व में चला 43 दिनों का लंबा धरना।
वर्तमान स्थिति: एमडी की जानसठ रोड कोठी के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू।

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