
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार ने ‘ब्याज माफी योजना 2026’ को हरी झंडी दे दी है। इस कड़ी में राज्य कर विभाग के निर्देश पर मुजफ्फरनगर सम्भाग में लंबित पुराने कर मामलों के निस्तारण की कवायद तेज कर दी गई है। योजना के तहत 31 दिसंबर 2025 तक के विभिन्न कर अधिनियमों के अंतर्गत सृजित बकायों के ब्याज और अर्थदंड में भारी छूट का प्रावधान किया गया है, जिसका लाभ उठाकर मुजफ्फरनगर के 17,433 व्यापारी अपने पुराने वित्तीय विवादों से मुक्ति पा सकते हैं।
जिले में कुल 33,081 व्यापारी पंजीकृत हैं, जिनमें से 17,619 वर्तमान में एक्टिव श्रेणी में हैं। वहीं, जीएसटी व्यवस्था लागू होने से पूर्व के वैट व अन्य पुराने कर कानूनों के तहत जिले में कुल 17,433 व्यापारी बकायादार श्रेणी में दर्ज हैं। इन व्यापारियों पर कुल मिलाकर लगभग ₹44,976.0 लाख (449.76 करोड़ रुपये) की बड़ी धनराशि बकाया चली आ रही है। नई योजना के लागू होने से इन सभी बकायादार कारोबारियों को अपनी पुरानी देनदारियों का निस्तारण करने का एक स्वर्णिम अवसर मिला है।
बकाये के आधार पर तय की गई राहत की दरें:
राज्य कर विभाग द्वारा बकायेदार व्यापारियों की श्रेणी और धनराशि के आधार पर छूट की दरें निर्धारित की गई हैं:
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10 लाख रुपये तक के बकायेदार: मूल धनराशि जमा करने पर 100 प्रतिशत ब्याज और संपूर्ण अर्थदंड (पेनल्टी) माफ कर दिया जाएगा।
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10 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के बकायेदार: मूल राशि का शत-प्रतिशत भुगतान करने पर केवल 10 प्रतिशत ब्याज देना होगा (90% ब्याज माफ) और 100% पेनल्टी माफ रहेगी।
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1 करोड़ से 5 करोड़ रुपये तक के बकायेदार: मूल बकाया जमा करने पर 25 प्रतिशत ब्याज देय होगा, जबकि 75 प्रतिशत ब्याज और 100 प्रतिशत पेनल्टी पूरी तरह माफ कर दी जाएगी।
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5 करोड़ रुपये से अधिक के बकायेदार: संपूर्ण मूल धनराशि जमा करने पर व्यापारी को 50 प्रतिशत ब्याज देना होगा, जबकि शेष 50 प्रतिशत ब्याज और 100 प्रतिशत पेनल्टी से पूर्ण छूट मिलेगी।
अधिकारी का कथन
“राज्य कर विभाग के बकायदारों के लिए बकाया व ब्याज की धनराशि में माफी योजना लागू हुई है। 10 लाख रुपये से लेकर पांच करोड़ से ऊपर तक के बकायदारों पर 100 प्रतिशत जुर्माना (पेनल्टी) माफ किया गया है, वहीं ब्याज माफी का प्रतिशत श्रेणी अनुसार अलग-अलग रखा गया है। व्यापारियों को समय रहते इस योजना का लाभ उठाने के लिए विभाग में अपनी बकाया धनराशि जमा करानी चाहिए।”
— राजनाथ तिवारी, संयुक्त आयुक्त (जीएसटी), मुजफ्फरनगर
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