
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर के पिछड़ा वर्ग नेता और सामाजिक न्याय मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व सांसद राजपाल सैनी ने एक बार फिर बड़ा सियासी दांव चलते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का साथ छोड़ दिया है। शुक्रवार को उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) में वापसी कर ली है। अपने 35 साल लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने सांतवी बार पाला बदला है। इससे पहले उन्होंने 2022 का विधानसभा चुनाव राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के टिकट पर खतौली से लड़ा था और बाद में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी।राजपाल सैनी 90 के दशक में पहली बार जनता दल से जुड़े थे। इसके बाद वह मुलायम सिंह यादव के करीबी रहकर सपा में जिलाध्यक्ष रहे, फिर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर राज्यसभा सांसद और मंत्री बने थे। अब फिर से उनके इस राजनीतिक फेरबदल को क्षेत्र में आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
ऊर्जा निगम की नौकरी से तय हुआ था सियासी सफर
पूर्व सांसद राजपाल सैनी ने 35 साल के सियासी जीवन में शुक्रवार को सातंवी बार सियासी पाला बदला है। मुजफ्फरनगर के बढ़ाना क्षेत्र के गांव लूहसाना निवासी राजपाल सैनी ने अपने करियर की शुरुआत ऊर्जा निगम की नौकरी छोड़कर की थी। पिछड़ा वर्ग में अपना अच्छा प्रभाव रखने वाले राजपाल सैनी 90 के दशक में पहली बार जनता दल के प्रदेश महासचिव बने थे। जनता दल के टिकट पर उन्होंने शहर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा। 1994 में पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के कहने पर फिर सपा में शामिल हुए थे।
1994 में रहे सपा जिलाध्यक्ष, 2010 में बने थे बसपा से राज्यसभा सदस्य
सपा में शामिल होते ही राजपाल सैनी को 1994 में सपा जिलाध्यक्ष बनाया गया था, जो लगातार चार साल तक इस पद पर रहे। इसके बाद 1998 में बसपा में शामिल होकर बसपा जिलाध्यक्ष बने। 1999 में मुजफ्फरनगर लोकसभा से बसपा के टिकट पर सांसद का चुनाव लड़ा। वर्ष 2002 में मोरना विधानसभा सीट से एमएलए बनने के बाद बसपा सरकार के युवा कल्याण व खेल मंत्री मंत्री बने। 2007 में बसपा सरकार में खाद बीज निगम के चेयरमैन भी रहे। इसके बाद वर्ष 2010 में एक राज्यसभा सीट खली हुई तो बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाकर संसद भेजा। इसके बाद अगस्त 2021 में समाजवादी पार्टी जॉइन की और 2022 विधानसभा चुनाव गठबंधन में रालोद के टिकट पर खतौली से लड़ा। इसके बाद भाजपा में शामिल हुए, लेकिन भाजपा से उन्हें कुछ खास नहीं मिल पाया, जिसके चलते तीन साल बाद ही दोबारा अब सपा का दामन थामा है।
राजनीतिक पिच पर पहली बार में ही हार गया था बेटा शिवान सैनी
राजनीतिक पिच पर लंबी पारी खेलने वाले राजपाल सैनी ने खुद तो सभी दलों में बेहतर बल्लेबाजी की, लेकिन बेटे को राजनीति में पास कराने की चाह अभी उनकी अधूरी है। हालांकि वह अपने बेटे शिवान सैनी को वर्ष 2017 में खतौली विधानसभा सीट से बसपा से चुनाव लड़वा चुके हैं, लेकिन उन्हें वहां जीत हांसिल नहीं हुई। शिवान सैनी का टिकट भी उन्होंने अपने वजूद पर जबरन कराया था। सूत्र बताते हैं कि वह फिर से बेटे शिवान सैनी को खतौली या मीरापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाने की जुगत में हैं।
Post Views: 215












Total views : 437796