
लोकपथ लाइव, लखनऊ: उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्रों में वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री आवास पर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ और बुलंदशहर सहित प्रदेश के एनसीआर से जुड़े 8 जिलों की कार्ययोजना का जायजा लिया गया।
वाहन और औद्योगिक प्रदूषण पर कड़े कदम: बैठक के दौरान वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए पुरानी गाड़ियों, नई ईवी नीति, इलेक्ट्रिक बसों के संचालन, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) की अनिवार्यता और एग्रीगेटर वाहनों पर विस्तार से चर्चा हुई। वहीं, औद्योगिक प्रदूषण की समीक्षा करते हुए बताया गया कि प्रदेश के लगभग 80 प्रतिशत उद्योगों में ओसीईएमएस (ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली) और एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस लगाए जा चुके हैं। बाकी बचे उद्योगों में भी इन्हें जल्द अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
धूल नियंत्रण और वेस्ट मैनेजमेंट: सड़कों पर उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए मैकेनाइज्ड और डीप क्लीनिंग की कार्ययोजना पर सहमति बनी। इसके अलावा सॉलिड वेस्ट और कंस्ट्रक्शन एंड डेमोलिशन (C&D) वेस्ट मैनेजमेंट नियमों को कड़ाई से लागू करने के लिए हितधारकों के साथ परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) में यूपी का प्रदर्शन: केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि एनसीएपी के तहत देश के 130 शहरों के ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण’ में लखनऊ ने पहला स्थान हासिल किया है, जबकि आगरा का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा है। भूपेंद्र यादव ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत लक्ष्य से अधिक पौधरोपण के लिए सीएम योगी की सराहना की।
क्षेत्रीय समन्वय और संयुक्त प्रयास: केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के सिलसिले में हरियाणा और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों के बाद यह बैठक हुई है, और जल्द ही पंजाब व राजस्थान के मुख्यमंत्रियों के साथ भी चर्चा की जाएगी। पराली प्रबंधन के लिए कृषि मंत्रालयों के बीच अंतर-राज्यीय समन्वय जारी है। इस बैठक में सीएक्यूएम (CAQM) अध्यक्ष राजेश वर्मा और राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
Post Views: 52













Total views : 417917