
जयपुर आरबीआई भेजे गए बंडलों ₹4.30 लाख की कमी से खुला राज
दिल्ली-मेरठ से पहुंची जांच टीमों का एक-एक नोट पर पहरा
लोकपथ लाइव, सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट से देश की सबसे बड़ी जाली करेंसी रिकवरी में से एक का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घंटाघर स्थित सोफिया मार्केट चेस्ट से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) जयपुर भेजे गए पैसों में महज ₹4,30,900 की कमी मिलने पर जब दिल्ली और मेरठ मुख्यालय की टीमों ने जांच शुरू की, तो बैंक अधिकारियों के होश उड़ गए। शुरुआती जांच में जहां 7.40 करोड़ रुपये के नकली नोट मिले थे, वहीं सोमवार देर रात तक यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 17 करोड़ रुपये की जाली करेंसी तक पहुंच गया। इस गंभीर लापरवाही और आपराधिक षड्यंत्र में शामिल पाए जाने पर बैंक प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है, जबकि एक पार्ट-टाइम हाउसकीपर को सेवा से हटा दिया गया है। मामले में स्थानीय पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई गई है। इस गबन की एसआईटी जांच शुरु हो गई है।


कैसे शुरू हुआ खुलासा: 11.50 करोड़ के बंडल से पकड़ी गई चोरी
सहारनपुर में पीएनबी की लगभग 72 शाखाएं संचालित होती हैं, जिनके लेन-देन के लिए सोफिया मार्केट और गंगोह में दो मुख्य करेंसी चेस्ट बनाए गए हैं। 5 अगस्त को सोफिया मार्केट चेस्ट से सड़े-गले व कटे-फटे नोटों का 11.50 करोड़ रुपये का आवंटन जयपुर स्थित आरबीआई कार्यालय भेजा गया था। जयपुर आरबीआई केंद्र पर नोटों की गिनती के दौरान अधिकारियों को ₹4.30 लाख से अधिक की कमी (शॉर्टेज) मिली। इसकी शिकायत तुरंत पीएनबी के मेरठ अंचल कार्यालय को भेजी गई। मेरठ से आई विशेष टीम ने जब सहारनपुर चेस्ट में रखे नोटों के बंडलों की स्कैनिंग शुरू की, तो असली नोटों के बीच भारी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाले जाली नोट ठूंसे हुए मिले।

तीन अधिकारियों पर गिरी गाज
इस गंभीर लापरवाही और आपराधिक षड्यंत्र में शामिल पाए जाने पर बैंक प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है, जबकि एक पार्ट-टाइम हाउसकीपर को सेवा से हटा दिया गया है। मामले में स्थानीय पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई गई है। असली नोटों की गडियों के बीच जाली नोटों की भरमार रही, जिसमें बैंक के अधिकारियों के घोटाला करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इन सस्पेंड किये गये अधिकारियों की उस एंगल से भी जांच पड़ताल की जा रही है, नकली नोटों के गिरोह से उनके किस प्रकार का नेटवर्क जुडा है, जिसके कारण बैंक में जाली करेंसी पहुंच रही है और बैंक असली नोटी की गड्डी में उन्हें कैसे ठूंस रहे हैं।
चेस्ट तक कैसे पहुंची जाली करेंसी? बड़े नेटवर्क का शक
बैंक नियमावली के अनुसार, किसी भी शाखा या चेस्ट में पैसे जमा करने से पहले ऑटोमैटिक सॉर्टिंग मशीनों और स्कैनर से नोटों की प्रामाणिकता जांचना अनिवार्य है। ऐसे में करोड़ों रुपये की जाली करेंसी का सीधे करेंसी चेस्ट के भीतर मौजूद होना बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की सीधी साठगांठ की ओर इशारा करता है। अधिकारियों को अंदेशा है कि किसी संगठित आपराधिक नेटवर्क ने असली नोटों के बंडलों से असली नकदी निकालकर उनके स्थान पर जाली नोटों की गड्डियां फिट कर दी थीं। जिस कागज और स्याही का इस्तेमाल इन नोटों में हुआ है, उसकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।
एक-एक नोट की गिनती जारी, बढ़ सकता है आंकड़ा
पीएनबी की मुख्य बैंक प्रबंधक निशा सिंह ने बताया कि दिल्ली और मेरठ मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में पिछले चार-पांच दिनों से चेस्ट के एक-एक नोट की बारीकी से जांच चल रही है। आशंका जताई जा रही है कि पूरे चेस्ट का ऑडिट पूरा होने तक जाली नोटों का यह आंकड़ा 17 करोड़ रुपये से भी आगे निकल सकता है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब इस बात की कड़ियां जोड़ रही हैं कि इन नकली नोटों की छपाई कहां हुई थी और इसका मास्टरमाइंड कौन है।











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