
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। मानसून की बारिश ने राष्ट्रीय राजमार्गों की ड्रेनेज व्यवस्था की पोल खोलनी शुरू कर दी है। मंगलवार को नेशनल हाईवे स्थित ग्राम नारा-जड़ौदा के समीप मूसलाधार बारिश के चलते सड़क पर समंदर जैसे हालात बन गए। घुटनों तक भरे पानी के कारण न सिर्फ गाड़ियों के पहिए थम गए, बल्कि नेशनल हाईवे पर बड़े हादसों की आशंका भी गहरा गई। गनीमत रही कि मामले की भनक लगते ही जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाई।
जिलाधिकारी उमेश मिश्रा के सख्त रुख के बाद तहसील सदर की टीम तुरंत एक्टिव मोड में आई। तहसीलदार सदर राधेश्याम गोड अपनी पूरी राजस्व टीम को लेकर सीधे ग्राउंड जीरो पर पहुंचे। मौके की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने संबंधित विभागों के अफसरों को आड़े हाथों लिया और तत्काल जल निकासी के इंतजाम शुरू कराए।
ऑन द स्पॉट एक्शन: जेसीबी से उलीचा गया पानी
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नाला जाम, सड़क पर पानी: जांच में सामने आया कि हाईवे के किनारे बना मुख्य नाला गाद, मिट्टी और कचरे से पूरी तरह चोक था, जिसके कारण बारिश का पानी सड़कों पर बैक मार रहा था।


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युद्धस्तर पर सफाई: तहसीलदार के निर्देश पर तुरंत जेसीबी मशीनों को मौके पर उतारा गया। नाले की व्यापक खुदाई कर जमा हुआ मलबा हटाया गया, जिसके बाद हाईवे पर जमा पानी तेजी से बाहर निकल सका और यातायात सुचारू हुआ।

लापरवाही पर सख्त हिदायत: दोबारा पानी भरा तो खैर नहीं
जलभराव की समस्या का टेंपरेरी नहीं बल्कि परमानेंट इलाज करने के दावों के साथ तहसीलदार सदर ने मातहतों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बारिश के पूरे सीजन में ड्रेनेज सिस्टम पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाए। तहसीलदार ने दो टूक लहजे में कहा कि जनता की सुरक्षा और हाईवे पर बेरोकटोक यातायात हमारी टॉप प्रायोरिटी है। अगर किसी भी इलाके से दोबारा जलभराव की शिकायत आई या लापरवाही मिली, तो संबंधित अधिकारियों पर सीधी गाज गिरेगी। अभियान के दौरान राजस्व और हाईवे अथॉरिटी के कर्मचारी मुस्तैद रहे।
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