
लोकपथ लाइव, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राजधानी के लोकभवन में ‘मिशन रोजगार’ के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया से चयनित 930 कंप्यूटर ऑपरेटरों (ग्रेड-ए) को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर नवचयनित अभ्यर्थियों को डिजिटल वॉरियर्स और स्मार्ट पुलिसिंग का सारथी बताते हुए सीएम योगी ने उन्हें आत्म-अनुशासन का कड़ा पाठ पढ़ाया। मुख्यमंत्री ने दोटूक लहजे में कहा कि ड्यूटी के प्रति सजगता और हर कार्य में गंभीरता अनिवार्य है। ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया के लिए रील बनाना साफ तौर पर अनुशासनहीनता है। पुलिसकर्मियों को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे वे जनता के बीच हंसी का पात्र बनें।
मुख्यमंत्री ने पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के लिए भर्ती बोर्ड को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यूपी पुलिस ने बीते कुछ वर्षों में अपनी कार्यप्रणाली से देश के भीतर एक नई और सुरक्षात्मक पहचान बनाई है। यह नई पहचान सिर्फ संख्या बल की वजह से नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन के लक्ष्य को धरातल पर उतारने और त्वरित गति से काम करने का परिणाम है।
अभिभावकों से पूछें, 2017 के पहले कैसा था यूपी: नवचयनित युवाओं को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि आज से 10 वर्ष पहले के अखबारों की खबरें देखिए या अपने गुरुजनों और माता-पिता से पूछिए कि 2017 से पहले का उत्तर प्रदेश कैसा था? तब औसतन हर दूसरे-तीसरे दिन दंगे होते थे, त्योहारों से पहले उपद्रव भड़कते थे और महीनों कर्फ्यू लगा रहता था। आज बीते 9 वर्षों में यूपी के भीतर एक भी कर्फ्यू नहीं लगा है।


2017 से पहले पुलिस ही असुरक्षित थी: पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति यह थी कि खुद पुलिस अधिकारी ही महफूज नहीं थे। मुरादाबाद में डीआईजी स्तर के वरिष्ठ अधिकारी को उपद्रवियों ने घेरकर इस कदर पीटा था कि उन्हें मृत समझकर छोड़ गए थे। जब राज्य में आईपीएस स्तर के अफसर सुरक्षित नहीं थे, तो सामान्य नागरिक, व्यापारी, महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा की कल्पना ही बेमानी थी। सीएम ने कहा कि आज हमारी सरकार के अभियोजन पक्ष की सख्त पैरवी का नतीजा है कि अपराधियों को कोर्ट से ऐसी सजाएं मिल रही हैं कि उनकी पीढ़ियां भी अपराध करना भूल जाएंगी।
अब रेंग नहीं रहा, बल्कि दौड़ रहा है उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री ने पुलिस रिफॉर्म और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की चर्चा करते हुए कहा कि 1972 से लटका हुआ पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम फाइलों से निकलकर आज 7 बड़े जनपदों में सफलतापूर्वक लागू है। पहले राज्य में मात्र 4 फॉरेंसिक लैब थीं, जो आज बढ़कर 12 हो चुकी हैं और 6 नई ए-ग्रेड लैब बन रही हैं। हर जिले में मोबाइल फॉरेंसिक वैन मौजूद है। पहले साइबर सुरक्षा का सिर्फ एक थाना था, आज सभी 75 जिलों में साइबर थाने और हेल्प डेस्क एक्टिव हैं। पुलिस जवानों के लिए 56 जनपदों में हाईराइज बैरक की सुविधाएं दी जा रही हैं। ये बुनियादी बदलाव साफ बताते हैं कि उत्तर प्रदेश अब रेंग नहीं रहा है, बल्कि विकास की राह पर दौड़ रहा है।
बिना सिफारिश सवा दो लाख भर्तियां, केवल मेरिट को सम्मान: पारदर्शिता का हवाला देते हुए सीएम योगी ने कहा कि बीते 9 वर्षों में सवा दो लाख से अधिक पुलिस कार्मिकों की भर्ती बिना किसी सिफारिश और बिना किसी भेदभाव के पूरी तरह पारदर्शी ढंग से की गई है। हाल ही में 28 लाख युवाओं की सहभागिता वाली 35 हजार पुलिस आरक्षी परीक्षा भी सकुशल संपन्न हुई है। जब शासन स्तर से आपके चयन में कोई भेदभाव नहीं हुआ है, तो विभाग भी आपसे पूरी ईमानदारी और अनावश्यक पेंडेंसी को खत्म कर दायित्व निभाने की उम्मीद रखता है।
इस गरिमामयी नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के अवसर पर वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा, पुलिस महानिदेशक (कारागार) पीसी मीणा, भर्ती बोर्ड के महानिदेशक एसबी शिरडकर और एडीजी (तकनीकी सेवाएं) नवीन अरोड़ा सहित शासन और पुलिस विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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