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वैश्विक पुनर्जागरण: बाली की धरती से गूंजेगा सनातन और योग का वैभव, जुड़ेगा स्वर्णिम अध्याय

पतंजलि और इंडोनेशिया के हिंदू विश्वविद्यालय के बीच ऐतिहासिक समझौता
लोकपथ लाइव, हरिद्वार/बाली: वैश्विक मंच पर सनातन संस्कृति, योग के गौरव और आधुनिक शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। पतंजलि योगपीठ और इंडोनेशिया के एकमात्र हिंदू विश्वविद्यालय, ‘यूनिवर्सिटी हिंदू नेगरी’ (UHN) के बीच बाली में एक अत्यंत महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह रणनीतिक साझेदारी न केवल भारत और इंडोनेशिया के बीच शैक्षणिक और अनुसंधान (Research) के एक नए सेतु का निर्माण करेगी, बल्कि बाली की पवित्र धरती पर सनातन और योग के प्राचीन वैभव को आधुनिक स्वरूप में पुनर्जीवित करने में एक मील का पत्थर साबित होने वाली है। पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण की अगुवाई में संपन्न हुआ यह समझौता दुनिया के सामने संस्कृति आधारित विकास का एक अनूठा और अनुकरणीय मॉडल पेश करता है।

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शैक्षणिक और योग अनुसंधान पर सहमति
इस ऐतिहासिक समझौते के तहत दोनों प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के बीच छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए ‘स्ट्रेट सेशन’ (सीधे शैक्षणिक सत्र) आयोजित करने पर पूर्ण सहमति बनी है। इसके साथ ही दोनों देश मिलकर उच्च स्तरीय अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय योग प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन भी करेंगे। उल्लेखनीय है कि इंडोनेशिया का यह विशिष्ट विश्वविद्यालय कुल 35 अलग-अलग संकायों का संचालन करता है, जिससे इस समझौते का दायरा बेहद व्यापक हो जाता है। बाली आगमन पर प्रोफेसर डॉ. गुस्ती न्गुराह सुदियाना और प्रोफेसर माडे पूर्नामा की अगुवाई में विश्वविद्यालय की प्रबंध समिति ने श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण और पतंजलि के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का भावपूर्ण और पारंपरिक स्वागत किया। इस आत्मीयता से अभिभूत होकर आचार्य श्री ने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि पतंजलि बहुत जल्द इंडोनेशिया की धरती पर शिक्षा, योग और सनातन संस्कृति को पुनर्स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर व्यावहारिक कार्य शुरू करने जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय परंपरा के संवाहक और बाली के एकमात्र हिंदू विधायक डॉ. सोमवीर भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इंडोनेशियाई विस अध्यक्ष की भारत आने की इच्छा
इस वैश्विक साझेदारी से इंडोनेशिया के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में भी भारी उत्साह है। बाली प्रांत के विधानसभा अध्यक्ष देवा माडे महायज्ञ ने पतंजलि के उच्च गुणवत्तायुक्त स्वदेशी उत्पादों और आयुर्वेद के क्षेत्र में किए गए कार्यों की जमकर सराहना की। आचार्य श्री के प्रति अपनी सहृदयता प्रकट करते हुए उन्होंने इच्छा जताई कि वे बहुत जल्द भारत (पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार) का दौरा करेंगे, जो उनके भारत के प्रति गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रेम को दर्शाता है। विधानसभा अध्यक्ष ने आचार्य बालकृष्ण की मौजूदगी में कहा कि वे पतंजलि के साथ मिलकर इंडोनेशिया में शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम करना चाहते हैं। पतंजलि की ओर से आचार्य बालकृष्ण ने भी इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए बाली में अपनी संस्कृति-आधारित विकास पद्धतियों और जैविक कृषि मॉडलों को आगे बढ़ाने पर अपनी पूर्ण सहमति दी।

बाली के मॉडल से संवरेगा उत्तराखंड का ‘माला’ गांव
इस यात्रा के दौरान आचार्य बालकृष्ण ने बाली द्वीप की समृद्ध संस्कृति, प्राचीन सभ्यता और वहां के पर्यावरण संरक्षण के तरीकों का बेहद गहन अध्ययन किया। उन्होंने विशेष रूप से इस बात को रेखांकित किया कि कैसे प्रकृति और पर्यावरण को बिना कोई नुकसान पहुँचाए, बेहद खूबसूरती से सजावट और आधुनिक विकास किया जा सकता है। आचार्य ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि बाली के इसी ‘इको-फ्रेंडली डवलपमेंट मॉडल’ (पर्यावरण-अनुकूल विकास पद्धति) की तर्ज पर वे उत्तराखंड के पौड़ी जनपद के अंतर्गत आने वाले ‘धन्वंतरि धाम माला गांव’ को भी एक आदर्श और पर्यावरण-अनुकूल गांव के रूप में विकसित करेंगे। यह कदम उत्तराखंड के ग्रामीण पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

सांस्कृतिक समागम से जीवंत हुई साझी विरासत
इस ऐतिहासिक समझौते के अवसर पर इंडोनेशिया में दोनों देशों का एक अद्भुत सांस्कृतिक समागम देखने को मिला। जहां एक ओर पतंजलि की ओर से आईं साध्वी बहनों ने सुमधुर भजनों की सुंदर प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय कर दिया, वहीं दूसरी ओर इंडोनेशियाई कलाकारों ने अपने पारंपरिक अंदाज में योग मुद्राओं और मनमोहक लोक नृत्यों का प्रदर्शन किया। इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने सदियों पुरानी भारत-इंडोनेशिया की साझी विरासत और सांस्कृतिक संबंधों को एक बार फिर वैश्विक पटल पर जीवंत कर दिया।

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