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मुजफ्फरनगर में चिकित्सक ने मांगी रिश्वत , डीएम से शिकायत

लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। जनपद के मुख्य जिला अस्पताल में जहां सरकार मात्र एक रुपये की पर्ची पर आम जनता को बेहतर इलाज का दावा करती है, वहीं स्वास्थ्य कर्मियों और चिकित्सकों की कथित साठगांठ से रिश्वतखोरी का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। ताजा मामला एक गरीब लाचार मां की फरियाद के बाद सामने आया है, जहां बेटी के पैर की हड्डी के ऑपरेशन के नाम पर एक चिकित्सक द्वारा हजारों रुपये ऐंठने और दोबारा शिकायत करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने का सनसनीखेज आरोप लगा है। मामला जिला मजिस्ट्रेट के दरबार में पहुंचने के बाद प्रशासनिक और विभागीय गलियारों में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी ने प्रकरण को बेहद गंभीरता से लेते हुए तत्काल मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) को जांच के आदेश देते हुए पीड़ित बच्ची का निशुल्क ऑपरेशन सुनिश्चित कराने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
 नगर  निवासी रेश्मा नामक एक महिला अपनी लाचार बेटी को साथ लेकर कलेक्ट्रेट स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पहुंची। पीड़िता ने जिलाधिकारी उमेश कुमार मिश्रा से मुलाकात कर एक लिखित शिकायती पत्र सौंपा। शिकायती पत्र में जिला अस्पताल के तैनात एक हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. प्रदीप चतुर्वेदी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। महिला का कहना है कि कुछ समय पूर्व उसकी बेटी के पैर की हड्डी टूट गई थी, जिसके उपचार और हड्डी जोड़ने के लिए डॉक्टरों ने ऑपरेशन की बात कही थी। आरोप है कि संबंधित चिकित्सक ने ऑपरेशन की एवज में महिला की मजबूरी का फायदा उठाते हुए उससे आठ हजार रुपये की अवैध रकम वसूल ली, लेकिन इतनी बड़ी राशि ऐंठने के बावजूद बच्ची का ऑपरेशन ठीक से नहीं किया गया, जिससे उसकी हालत और बिगड़ गई।
पीड़िता का आरोप है कि जब वह इस बदइंतजामी की शिकायत लेकर पूर्व में उच्चाधिकारियों से मिली, तो अस्पताल पहुंचने पर संबंधित चिकित्सकों ने हमदर्दी दिखाने के बजाय उसे प्रशासनिक शरण लेने के कारण अंजाम भुगतने की धमकी दी और डराया-धमकाया।
इस संवेदनशील मामले में जब आरोपी हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप चतुर्वेदी से पक्ष जाना गया, तो उन्होंने कहा कि यह प्रकरण करीब एक महीने पुराना है, जिसके चलते वर्तमान में पूरी बात उन्हें याद भी नहीं है।  हालांकि, उन्होंने रिश्वत लेने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सफाई दी कि यदि बच्ची को इलाज की जरूरत है, तो उसका ऑपरेशन पूरी तरह निशुल्क किया जाएगा, कुछ आवश्यक उपकरण अस्पताल में नहीं है, उन्हें जरूर बाहर से मंगाना पड़ता है। दूसरी ओर, जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. संजय कुमार वर्मा ने इस पूरे मामले से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि शिकायत सीधे उनके पास नहीं आई है, फिर भी मामला गंभीर है और संबंधित चिकित्सक से पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी मांगी जा रही है।

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